परेशान हुए यात्रियों को कंपनी की ओर से ₹10,000 का ट्रैवल वाउचर दिया जाएगा। हालांकि एयरलाइन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि “ज्यादा परेशान” की परिभाषा क्या होगी और किन यात्रियों को यह मुआवजा मिलेगा।
एयरलाइन के अनुसार यह वाउचर अगले 12 महीनों तक किसी भी घरेलू उड़ान की बुकिंग में उपयोग किया जा सकेगा। यह मुआवजा उन ₹5,000–₹10,000 की राशि के अलावा होगा, जो फ्लाइट उड़ान से 24 घंटे के भीतर रद्द होने पर यात्रियों को मिलती है।
इधर एयरलाइन के एक वरिष्ठ अधिकारी गुरुवार को नागरिक उड्डयन नियामक (DGCA) के समक्ष पेश हुए। नियामक ने हाल ही में हुई उड़ान अव्यवस्थाओं और देरी से जुड़े पूरे डेटा और रिपोर्ट मांगते हुए उन्हें तलब किया था।
नया नियम: 15 मिनट की तकनीकी देरी पर भी जांच अनिवार्य
फ्लाइट ऑपरेशंस में हाल की समस्याओं के बाद तकनीकी खामियों की निगरानी प्रणाली को तुरंत प्रभाव से बदल दिया गया है। लगातार हो रही देरी, कैंसिलेशन और सुरक्षा संबंधी मामलों को देखते हुए नियामक ने डिफेक्ट रिपोर्टिंग सिस्टम को और सख्त किया है।
12 पेज के नए निर्देश के अनुसार, किसी भी निर्धारित उड़ान में तकनीकी कारणों से 15 मिनट या अधिक की देरी होने पर जांच अनिवार्य होगी। कंपनी को बताना होगा कि देरी का कारण क्या था, उसे कैसे ठीक किया गया और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। यह प्रावधान पहले मौजूद नहीं था।
कंपनी को किसी भी ‘बड़े तकनीकी दोष’ की जानकारी तुरंत फोन पर DGCA को देनी होगी और 72 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी। यदि एक ही दोष तीन बार दोहराया जाता है, तो उसे रिपीटेटिव डिफेक्ट माना जाएगा और उस पर विशेष जांच शुरू होगी।
नियामक की यह सख्ती इसलिए आई क्योंकि मौजूदा रिपोर्टिंग व्यवस्था कमजोर मानी जा रही थी और न 15 मिनट की देरी की जांच अनिवार्य थी, न ही रिपीट डिफेक्ट की स्पष्ट परिभाषा मौजूद थी।

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