काल्पनिक दृश्य 
गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु थे। उनका जन्म 15वीं शताब्दी में पंजाब के तलवंडी गाँव (आज का ननकाना साहिब – पाकिस्तान) में हुआ था। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक देव जी प्रकाश पर्व मनाया जाता है। इस दिन को गुरुपर्व और गुरु नानक देव जी जयंती भी कहा जाता है।

गुरु नानक देव जी की मुख्य शिक्षाएँ

गुरु नानक देव जी ने समाज को तीन मुख्य सिद्धांत दिए –

1. नाम जपो – ईश्वर का स्मरण, ईश्वर से जुड़ी सजगता

2. किरत करो – ईमानदार मेहनत से रोटी कमाओ

3. वंड छको – कमाई में से ज़रूरतमंदों और गरीबों को भी हिस्सा दो

इन सिद्धांतों का उद्देश्य था कि मानव जीवन धर्म केवल पूजा तक सीमित न रहे, बल्कि मानवता से जुड़े कर्मों में दिखे।

गुरु नानक देव जी ने धार्मिक अंधविश्वास, जाति-भेद और भेदभाव का विरोध किया। उन्होंने कहा –

“ना कोई हिन्दू, ना कोई मुसलमान… सब इंसान।”

गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है?

गुरुपर्व से दो दिन पहले गुरुद्वारों में अखंड पाठ शुरू होता है – श्री गुरु ग्रंथ साहिब का निरंतर पाठ लगभग 48 घंटे तक चलता है।

जयंती के दिन नगर कीर्तन निकाला जाता है — सुंदर पालकी, कीर्तन, ढोल, निशान साहिब और संगत पूरे शहर में प्रभात फेरी निकाली जाती है।

गुरुद्वारों में लंगर का आयोजन होता है, जिसमें जाति-धर्म-नस्ल-भाषा की कोई सीमा नहीं होती — हर कोई बैठकर एक जैसा भोजन ग्रहण करता है। यही “वंड छको” की शिक्षा का सबसे जीवंत रूप है जिसे गुरु नानक देव जी ने दिया।

गुरु नानक देव जी का आज के समय में महत्व

आज के डिजिटल दौर में जहाँ वक्त, रिश्तों और मूल्यों की कमी महसूस होती है — गुरु नानक देव जी की सीख और ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है।

उनकी शिक्षाएँ हमें बताती हैं —

सफलता मेहनत से प्राप्त होती है

धन बाँटने से घटता नहीं, बढ़ता है

ईश्वर हमारे अंदर है

निष्कर्ष

गुरु नानक जयंती केवल एक पर्व नहीं — मानवता, समानता, सत्य और शांति का संदेश है।

गुरु नानक देव जी के शब्द आज भी उतने ही क़ीमती हैं जितने उनके समय में थे।

वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फ़तह।

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