इंदौर में वीआईपी नंबर की सफल बोली के बाद भी नंबर आवंटित न करने पर हाईकोर्ट ने आरटीओ की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने अपनी स्कॉर्पियो के लिए ऑनलाइन नीलामी में हिस्सा लिया था। बोली जीतने और पूरी राशि जमा करने के बावजूद आरटीओ ने उसे निर्धारित वीआईपी नंबर की जगह रूटीन नंबर जारी कर दिया।

हाईकोर्ट ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए निर्देश दिया कि वाहन पर दिया गया रूटीन नंबर तुरंत निरस्त किया जाए और याचिकाकर्ता को वही वीआईपी नंबर आवंटित किया जाए, जिसके लिए उसने तय प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया था। आदेश जस्टिस वर्मा की बेंच ने 13 नवंबर को सुनाया।

शिकायतों पर नहीं हुई कार्रवाई

याचिकाकर्ता ने परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शिकायतें भेजीं, लेकिन एक महीने तक कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला वीआईपी नंबर MP-09 ##-0101 की नीलामी से जुड़ा है, जबकि आरटीओ ने वाहन को रूटीन नंबर MP-09 ##-6046 जारी कर दिया था।

कोर्ट ने लगाए कड़े सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि जब आवेदक सफल बोलीदाता घोषित हो चुका था और राशि भी समय पर जमा कर दी गई थी, तो फिर रूटीन नंबर कैसे दिया गया? याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील की दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि रूटीन नंबर रद्द कर तुरंत वीआईपी नंबर आवंटित किया जाए। सरकारी वकील ने भी कोर्ट से उपयुक्त आदेश पारित करने का आग्रह किया।

आरटीओ में अनियमितताओं पर सवाल

वीआईपी और फैंसी नंबरों की नीलामी से हर साल करोड़ों रुपए की आय होती है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अनियमितताएं जारी हैं। आमतौर पर दलालों के जरिए ही काम आसानी से होता है, जबकि प्रक्रिया स्वयं पूरी करने पर कई बार बाधाएं आती हैं। विभाग लंबे समय से पारदर्शिता के दावे करता रहा है।


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