MP में एक एसडीएम पर आदिवासी चपरासी से मारपीट का आरोप लगा है। इस बारे में शिकायत के बाद पहले तो पुलिस ने कुछ नहीं किया, लेकिन घटना के पांच दिन बाद कार्रवाई करते हुए उसने चपरासी का मेडिकल परीक्षण कराया है।

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, यहां एक आदिवासी चपरासी जब एसडीएम का फोन नहीं उठा सका, तो साहब का गुस्सा इतना भड़क गया कि अगले दिन उन्होंने उसे अपने बंगले पर बुलाकर उसके साथ जमकर मारपीट की। लेकिन पीड़ित के साथ अन्याय यहीं खत्म नहीं हुआ, इसके बाद जब वह इस बात की शिकायत करने पुलिस के पास पहुंचा तो वहां से भी उसे दफा कर दिया गया। हालांकि इस बारे में जब उसने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की, तब जाकर पुलिस को अपने दायित्व का अहसास हुआ और घटना के पांच दिन बाद उसने पीड़ित चपरासी की शिकायत पर एक्शन लेते हुए उसका मेडिकल परीक्षण कराया है। उधर कलेक्टर ने भी इस मामले को लेकर आरोपी एसडीएम को नोटिस जारी किया है।

आदिवासी चपरासी के साथ मारपीट करने का आरोप सबलगढ़ एसडीएम अरविंद माहौर पर लगा है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कैलारस तहसील में पदस्थ चपरासी सियाराम ने इस बारे में आरोप लगाया है। सियाराम का कहना है कि 5 सितंबर की रात उसके पास एसडीएम माहौर का फोन आया, लेकिन किसी कारणवश वह उस कॉल को रिसीव नहीं कर पाया। जिसके बाद 6 सितंबर को एसडीएम ने उसे अपने बंगले पर बुलाया, जहां चार अन्य कर्मचारियों के सामने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इससे उसे अंदरूनी चोटें आईं और डर के कारण वह घर से भी बाहर नहीं निकल पा रहा है।

पीड़ित ने इस मामले की शिकायत करते हुए पहले पुलिस को आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उसने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर दी। शिकायत दर्ज होने के पांच दिन बाद पुलिस हरकत में आई और गुरुवार को आनन-फानन में उसका मेडिकल कराया गया। पुलिस का कहना है कि डॉक्टरों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। सियाराम यह आरोप भी लगा रहा है कि पुलिस थाने से फोन कर उस पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

इधर, पीड़ित की पत्नी ने जब कलेक्टर अंकित अस्थाना से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी तो कलेक्टर ने उसे आश्वस्त किया कि डरने की जरूरत नहीं है। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सबलगढ़ एसडीएम अरविंद माहौर को नोटिस जारी किया है।


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