दो साल पहले विवेक का भाई भी इंदौर आ गया और वह चिराग के प्रति विवेक को भड़काने लगा। बस इसके बाद से ही विवेक व चिराग के बीच मनमुटाव होने लगा था। विवेक चिराग पर हावी होने की कोशिश करता था। चिराग ने पुलिस में शिकायत करने की तैयारी भी की थी। 

इंदौर में 20 दिन पहले हुई चिराग जैन की हत्या की करने वाला उसका बचपन का दोस्त पुलिस रिमांड पर है। उसे अब हत्या का पछतावा भी हो रहा है। वह पुलिस अफसरों से बोला कि हमारे समाज में तो जीव हत्या भी पापा है, मेरे हाथों मेरे दोस्त की हत्या हो गई। मैं नहीं चाहता था उसकी हत्या कराना। मैं सिर्फ धमकाने गया था, लेकिन उनसे दरवाजे पर भी मुझे दुत्कारना शुरू कर दिया।

घर गिरवी रखा होने के कारण, आर्थिक दिक्कतों के कारण मैं तनाव में था। रात को नींद नहीं आती थी। मुझे नींद की गोलियां लेना पड़ रही थी। हत्या से पहले वाली रात को देर तक नींद नहीं आई। बस यही सोचा था कि सुबह उठकर चिराग के घर जाऊंगा और बात फायनल कर दूंगा। मैने बेल बजाई तो दरवाजा उसने खोला, लेकिन वह घर पर बात करने को तैयार नहीं था। मुझे लौट जाने के लिए कहा। बस मुझे गुस्सा आ गया। जब मैं उसे चाकू मार रहा था तो उसका बेटा मुझे रोक रहा था, लेकिन मेरे सिर पर खून सवार हो गया था।

विवेक का भाई देने लगा था दखल

विवेक व चिराग साथ में पढ़े है। विवेक अपने भाईयों के साथ ग्वालियर में कारोबार करता था। चिराग जैन पहले इंदौर आया था। फिर उसने विवेक को इंदौर बुलाया और अपना व्यापारिक साझेदार बनाया। दस साल तक दोनो ने मिलकर व्यापार बखूबी संभाला। दो साल पहले विवेक का भाई भी इंदौर आ गया और वह चिराग के प्रति विवेक को भड़काने लगा। बस इसके बाद से ही विवेक व चिराग के बीच मनमुटाव होने लगा था। विवेक चिराग पर हावी होने की कोशिश करता था। चिराग ने विवेक और उसके भाई की पुलिस में शिकायत करने की तैयारी भी की थी। बाद में बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश भी होती रही।

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