इंदौर के सराफा बाजार में चांदी-सोना-जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन की आम सभा आयोजित हुई, जिसमें एक ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लिया गया। एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि सराफा बाजार में अब चाट-चौपाटी नहीं लगेगी।
इसके साथ ही, सराफा की दुकानें, जो पहले शाम 7-8 बजे बंद हो जाती थीं, अब रात 10 बजे तक खुली रहेंगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी ने इसे व्यापारियों का मौलिक अधिकार बताते हुए कहा, "सराफा बाजार की अस्मिता सोने, चांदी और जवाहरात के व्यापार से है। कोई भी हम पर अपनी मर्जी नहीं थोप सकता। हम अपनी अस्मिता की लड़ाई हर स्तर पर लड़ेंगे।"
सभा में उपस्थित सैकड़ों व्यापारियों ने एकजुट होकर संगठन के इस फैसले का समर्थन किया। उपाध्यक्ष अविनाश शास्त्री ने कहा, "होलकर राजाओं के जमाने से सराफा सोने-चांदी के लिए जाना जाता है। चौपाटी ने हमारे व्यापार को नुकसान पहुंचाया और बाजार की साख को कम किया। अब हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
चौपाटी विवाद: एक लंबी कहानी
इंदौर का सराफा बाजार देशभर में अपनी चाट-चौपाटी के लिए मशहूर है, जो रात में सजने वाली स्वादिष्ट व्यंजनों की दुकानों के लिए जाना जाता है। लेकिन यह चौपाटी सराफा के सोने-चांदी व्यापारियों के लिए पिछले कई सालों से विवाद का कारण रही है। व्यापारियों का कहना है कि चौपाटी की वजह से उनकी दुकानें समय से पहले बंद करनी पड़ती हैं, जिससे व्यापार को नुकसान होता है। साथ ही, गैस सिलेंडरों का बड़े पैमाने पर उपयोग रात में आगजनी का खतरा पैदा करता है, और ट्रैफिक जाम की समस्या भी बढ़ती है।
एसोसिएशन के अनुसार, चौपाटी की शुरुआत 40-50 साल पहले कुछ मिठाई व्यापारियों द्वारा छोटे पैमाने पर हुई थी, जो उस समय सीमित बिजली और रोशनी के कारण रात में दुकानों के बाहर खाने की बिक्री करते थे। लेकिन पिछले कुछ दशकों में यह चौपाटी एक बड़ा बाजार बन गया, जिसमें करीब 200 दुकानें शामिल हैं। इनमें से 80 पारंपरिक दुकानों को छोड़कर बाकी 120 को "अवैध" माना गया है। व्यापारियों ने मांग की थी कि इन दुकानों को 1 सितंबर 2025 से हटाया जाए।
हालांकि, इस मुद्दे पर नगर निगम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अलग रुख अपनाया। महापौर ने कहा कि 80 पारंपरिक दुकानों को सड़क पर जगह दी जाएगी, ताकि चौपाटी की परंपरा बनी रहे। लेकिन व्यापारियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। हुकुम सोनी ने कहा, "हमारी दुकानों के चबूतरे किराए पर नहीं दिए जाएंगे। चौपाटी पूरी तरह बंद होनी चाहिए।"
रात 10 बजे तक दुकानें: व्यापारियों का हक
एसोसिएशन ने यह भी फैसला लिया कि सराफा की दुकानें अब रात 10 बजे तक खुली रहेंगी। वर्तमान में, चौपाटी की दुकानें शाम 7 बजे से लगना शुरू हो जाती हैं, जिससे सराफा के सोने-चांदी व्यापारियों को जल्दी दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। इस नीति से व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होता है। अविनाश शास्त्री ने कहा, "रात 10 बजे तक दुकानें खोलना हमारा हक है। चौपाटी के कारण हमारा व्यापार 2-3 घंटे कम हो रहा है। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
स्थानीय व्यापारी रमेश जैन ने बताया, "चौपाटी की भीड़ और गंदगी से ग्राहक सराफा में सोने-चांदी की खरीदारी के लिए आने से कतराते हैं। रात 10 बजे तक दुकानें खुलने से हमारा कारोबार बढ़ेगा।"
चौपाटी व्यापारियों का पक्ष: टकराव की स्थिति
चाट-चौपाटी व्यापारियों ने इस फैसले का विरोध किया है। चाट-चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता ने कहा, "चौपाटी इंदौर की पहचान है। इसे हटाना गलत है। हम सुरक्षा, स्वच्छता और समयबद्धता के नियमों का पालन करने को तैयार हैं।" गुप्ता ने यह भी आश्वासन दिया कि चौपाटी की दुकानें अब रात 9 बजे से पहले नहीं लगेंगी, ताकि सराफा व्यापारियों को कोई परेशानी न हो।
हालांकि, सराफा व्यापारियों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। हुकुम सोनी ने कहा, "हमारी मांग साफ है-चौपाटी पूरी तरह हटे। आंशिक समाधान हमें मंजूर नहीं।" इस टकराव ने नगर निगम और महापौर के लिए चुनौती खड़ी कर दी है, जो चौपाटी को सराफा की परंपरा का हिस्सा मानते हैं।
महापौर और नगर निगम की भूमिका
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि 80 पारंपरिक दुकानों को सड़क पर जगह दी जाएगी, ताकि चौपाटी की रौनक बनी रहे। लेकिन सराफा व्यापारियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
हालांकि, सराफा व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम का यह रुख उनकी मांगों को नजरअंदाज करता है। व्यापारी नेता बसंत नीमा ने कहा, "नगर निगम चौपाटी को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा। हम कोर्ट जाएंगे, जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेंगे।"
सामाजिक और सियासी प्रतिक्रियाएं
इस फैसले ने इंदौर में सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने सराफा व्यापारियों के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि BJP सरकार चौपाटी को बढ़ावा देकर व्यापारियों का नुकसान कर रही है। कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला ने कहा, "सराफा व्यापारियों का फैसला सही है। BJP सरकार चौपाटी के नाम पर वोट की सियासत कर रही है।" BJP ने जवाब में कहा कि वे दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रख रहे हैं। BJP प्रवक्ता रमेश ठाकुर ने कहा, "चौपाटी इंदौर की शान है। हम इसे व्यवस्थित करेंगे, ताकि सराफा व्यापारियों को भी नुकसान न हो।"
आगे की राह
इस फैसले ने सराफा व्यापारियों को एकजुट तो किया है, लेकिन चौपाटी व्यापारियों और नगर निगम के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। 1 सितंबर 2025 से चौपाटी को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लागू होने वाला है, लेकिन महापौर और नगर निगम ने इसे चुनौती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान बातचीत या कानूनी रास्ते से ही निकल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो अजय मिश्रा ने कहा, "यह मामला सियासी रंग ले चुका है। BJP के लिए चौपाटी और सराफा व्यापारियों के बीच संतुलन बनाना चुनौती है।" सराफा व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं और जरूरत पड़ी तो कोर्ट का रुख करेंगे।
जैसा कि हुकुम सोनी ने कहा, "सराफा की अस्मिता हमारी प्राथमिकता है। हम अपने हक के लिए लड़ेंगे।" यह देखना बाकी है कि क्या यह विवाद सुलझेगा या इंदौर की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को लेकर एक नया टकराव शुरू होगा।
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