इतना तामझाम क्यों?

आज तक आप जितनी शादियों में गए होंगे, उनमें से अधिकांश में दुल्हा-दुल्हन की शक्ल तक नहीं देखी होगी या उनका नाम या शक्ल तक याद नहीं होगी। अक्सर स्टेज पर जाने के बाद जिसने आमंत्रित किया है  वह स्टेज पर जिस जगह खड़ा होता है उससे अंदाज लगता है कि लड़के की शादी में आए हैं या लड़की की शादी में । अक्सर  विवाह समारोहों मे जाना और वापस आना भी हो गया पर ख्याल तक नहीं आया और ना ही कभी देखने की कोशिश भी की कि स्टेज कहां सजा है , युगल कहाँ बैठा है। भारत में लगभग हर विवाह में हम अधिकांश जबरदस्ती  लोगों को निमंत्रण देते हैं। और उसका मुख्य कारण यह होता है कि उसने अपने बच्चों की शादी में हमें बुलाया था इसलिए हमें भी बुलाना चाहिए जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। 5. वो लोग जिसे आपके विवाह मे कोई रुचि नहीं।

जो आपका केवल नाम जानते हैं। जो केवल आपके घर की लोकेशन जानते हैं। जो केवल आपकी पद- प्रतिष्ठा जानते हैं। विवाह कोई भंडारा या कथा नहीं है कि हर आते जाते को राह चलते  रोक रोक कर प्रसाद दिया जाए। केवल आपके रिश्तेदारों, कुछ परिवारिक मित्रों के अलावा आपके विवाह मेंे किसी को कोई रुचि नहीं होती। ये ताम-झाम, पंडाल, झालर, सैकड़ों पकवान, आर्केस्ट्रा, डीजे, दहेज का मंहगा सामान एक संक्रामक बीमारी का काम करता है।

लोग आते हैं इसे देखते हैं और “मैं भी ऐसा ही या इससे अच्छा इंतजाम करूँगा”और लोग करते भी हैं।  लोग 75% खर्च बिना जरूरत का दिखावा करने में अपने जीवन भर की कमाई लुटा देते हैं। लोन ले लेते हैं।  और उधर विवाह मे आमंत्रित जनता दरवाजे से अंदर सीधे भोजन तक पहुंचकर, भोजन करके, लिफाफा पकड़ा कर निकल लेती है। आपके लाखों का ताम झाम उनकी आँखों में बस आधे घंटे के लिए पड़ता है।

पर आप उसकी किश्तें जीवन भर चुकाते हो। इस अपव्यय और दिखावे को रोकना होगा। विचार करना जरूरी है और उससे भी ज्यादा अमल करना जरूरी है।

रजनीश श्रीवास्तव, इंदौर

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