हमेशा एक नंबर पर आने की होड़ हमारे शहर को लग गई है और इसके लिए अफसरों की मेहरबानी ही कहेंगे, जो न जाने कितने ही अव्वल आने के मेडल दिल्ली से लेकर आए हैं। सफाई को लेकर तो दुनिया हमारे शहर का लोहा मान चुकी है... और मान भी रही है...! भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) की ईट राइट चैलेंज प्रतियोगिता में इंदौर जिला पूरे देश में प्रथम आया है और अब अव्वल आने की आदत हर क्षेत्र में हमारे शहर को पड़ गई है। 11 जून की ही तो बात है, प्री-मानसून की झमाझम बारिश करीब डेढ़ घंटे तक हुई...गर्मी से तो लोगों राहत मिली, लेकिन इस प्री-मानसून में हमारा शहर फिर अव्वल आया, जिसमें समस्या पहले नंबर पर रही...! वाटर प्लस का तमगा थामे घूम रहे नगर निगम ने सही में शहर को वाटर प्लस ! कर दिया है। शहर के पॉश एरिए से लेकर मोहल्लों तक में वाटर प्लस हो रहा है। मुख्य सड़कें भी तालाब बनकर मानो यह कह रही है कि वाहन मत चलाओ...तैरकर ही सड़क पार कर लो... या छपाक...छपाक... करते चले जाओ...!
शहर विकास कार्यों को लेकर भी हमेशा नंबर वन ही रहा! काम शुरू करो और उसे अधूरा रहने दो...। नगर निगम, बिजली विभाग और न जाने कितने ऐसे विभाग है, जो शहर में हमेशा ही अव्वल आ रहे हैं...! लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि नगर निगम और बिजली विभाग लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है...। जनता टैक्स दे रही है, लेकिन सुुविधा उन्हें नहीं मिल रही है। सड़कों पर कब्जे तो पहले ही मुसीबत बने हुए हैं..., दूसरा अब बारिश का सीजन है और प्री-मानसून की पहली बारिश में शहर के नंबर वन होने की पोल भी खोल दी है...। रही बिजली कंपनी की बात तो वह भी गुणवत्तापूर्ण सुविधा लोगों को देने के लिए तमगे हासिल कर चुकी है, लेकिन खुद विभाग के अफसर अपनी कमजोरी जानते हैं....। अभी बारिश पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है कि शहर में समस्या दिखने लगी है...। चार महीने तक जनता को समस्याओं से ही जूझना पड़ेगा, जैसा कि हर साल होता है। नगर निगम की जवाबदेही है कि सफाई व्यवस्था के साथ-साथ शहर की हर समस्या को समय पर पूरा करें और जनता को राहत दे, क्योंकि जनता आपको टैक्स देती है...। इंदौर की जनता काफी धैर्यशील है... और वह जानकर अव्वल आना नहीं चाह रही है, क्योंकि मर्यादा में रहना चाहती है..., अगर जनता अव्वल आ गई...! तो अफसरों को काफी भारी पड़ेगा...।
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