इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक जारी है। मंगलवार को बैठक का दूसरा दिन रहा। इसमें संगठन की आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना पर चर्चा की जा रही है। संघ ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों, स्व के भाव और नागरिक कर्तव्यों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इन पांच विषयों को 'पंच परिवर्तन' नाम दिया गया है।

शहर के एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान स्थित संत श्री रविदासजी महाराज सभागार में आयोजित बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस बार पहली बार सभी प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है। संगठनात्मक स्तर पर इस बदलाव की तैयारी पिछले 18 महीनों से की जा रही थी।

बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा भी हो रही है। सोमवार से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। इसके साथ ही शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए चलाए गए कार्यक्रमों का आकलन किया गया।

बैठक के दौरान युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता व्यक्त की गई। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए परिवार और समाज, दोनों स्तरों पर प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने पर विचार किया जा रहा है।

Gen-Z आंदोलनों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में जब कोई अपनी आवाज उठाता है, तो हर बार उसे पक्ष और विपक्ष के नजरिए से देखना उचित नहीं है। आंदोलनों का उद्देश्य देशहित में होना चाहिए। संघ इस तरह के विषयों पर सतर्कता से नजर रखता है।

बैठक में संघ के संगठनात्मक विस्तार से जुड़े आंकड़े भी साझा किए गए। जानकारी के मुताबिक, देशभर में दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1 लाख 1 हजार 151 हो गई है। वहीं, साप्ताहिक और मासिक मिलन को शामिल करने पर संघ की गतिविधियां 1 लाख 10 हजार 849 स्थानों तक पहुंच गई हैं।

पिछले साल अक्टूबर की तुलना में शताब्दी वर्ष के दौरान 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं। बैठक में शाखाओं की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी गतिविधियों और कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई।

संघ के अनुसार, शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में कुल 65 हजार 660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। शहरी क्षेत्रों में ये कार्यक्रम बस्ती स्तर पर, जबकि ग्रामीण इलाकों में मंडल स्तर पर हुए। कुछ स्थानों पर दो से तीन मंडलों को मिलाकर भी सम्मेलन आयोजित किए गए।

इन कार्यक्रमों में समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया। कई लोगों ने संघ की शाखाओं से जुड़ने में रुचि दिखाई। बैठक में इन आयोजनों से मिले अनुभवों, लोगों की भागीदारी और संगठन के सामाजिक विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।


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