उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में अयोध्या और विंध्याचल को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-135A के तीसरे चरण का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। जलालपुर तहसील क्षेत्र के खजुरी के पास रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज बनाने का काम शुरू हो गया है। वहीं, सड़क निर्माण में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को हटाने और दूसरी जगह स्थानांतरित करने का कार्य भी जारी है। इस परियोजना के पूरा होने से श्रद्धालुओं के साथ आम यात्रियों को भी बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी।
करीब 1,653 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस चरण का काम पूरा होने के बाद अकबरपुर और जलालपुर होते हुए अयोध्या तक पहुंचना आसान होगा। परियोजना के शुरुआती दो चरणों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि तीसरे चरण में विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य में लगी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर के अनुसार, बाईपास के निर्माण क्षेत्र में आने वाले सभी बिजली के खंभे हटाए जा चुके हैं। मुख्य मार्ग पर भी खंभों को स्थानांतरित करने का काम चल रहा है। अब तक लगभग 40 प्रतिशत खंभे हटाए जा चुके हैं।
खजुरी के पास बनने वाला ओवरब्रिज करीब एक किलोमीटर लंबा होगा और इसका निर्माण छह लेन के रूप में किया जाएगा। इसके तैयार होने से राजमार्ग के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है।
इस राष्ट्रीय राजमार्ग के पूरा होने से आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और बिहार से अयोध्या तथा विंध्याचल जाने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। साथ ही, क्षेत्र के आम लोगों के लिए भी आवागमन पहले की तुलना में सुगम हो सकेगा।
एनटीपीसी की राख से बाईपास निर्माण को मिलेगी गति
लगातार बारिश के कारण मिट्टी की भराई का काम प्रभावित हुआ था, जिससे बाईपास निर्माण की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। इस समस्या को दूर करने के लिए एनटीपीसी ने निर्माण एजेंसी को तीन लाख घन मीटर राख उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। फिलहाल खजुरी बाईपास पर राख डालने का काम किया जा रहा है। इससे मिट्टी भराई और सड़क निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है।
जनवरी 2028 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के प्रयागराज स्थित कार्यालय के अधिशासी अभियंता ने बताया कि संबंधित एजेंसी को जनवरी 2028 तक सड़क निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पेड़ों की कटाई में तेजी लाने के लिए वन निगम और वन विभाग को पत्र भेजा गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद अयोध्या और विंध्याचल के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय आवागमन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

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