स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान से संचालित एक कथित आतंकी-आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। एजेंसियों ने 14 राज्यों में एक साथ ऑपरेशन चलाकर शहजाद भट्टी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के पूर्व स्पेशल DGP और रिटायर्ड IPS अधिकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक करीब नौ महीने से इस नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। इस दौरान अलग-अलग राज्यों में खुफिया जानकारी जुटाने और कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा।
जांच के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित यह टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट सोशल मीडिया और संगठित अपराध के जरिए भारतीय युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करता था। एजेंसियों का आरोप है कि इसका इस्तेमाल हिंसा, जासूसी, हथियारों की तस्करी और लक्षित हमलों की साजिशों में किया जाता था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क का कथित सरगना पाकिस्तान के बहावलनगर का गैंगस्टर शहजाद भट्टी है। उसे सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें छोटे-छोटे अपराधों से जोड़ने का आरोप है।
भट्टी नेटवर्क इंस्टाग्राम, फेसबुक, टेलीग्राम, सिग्नल, व्हाट्सएप, स्नैपचैट और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था। खासतौर पर 18 से 25 साल की उम्र के बेरोजगार युवाओं, छोटे अपराधों में शामिल लोगों और आर्थिक परेशानी से जूझ रहे युवाओं को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
एजेंसियों के मुताबिक, भट्टी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। उसका नेटवर्क पारंपरिक आतंकी सेल के बजाय सोशल मीडिया को भर्ती के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल करता था।
जांच में सामने आया कि युवाओं को शुरुआत में छोटे काम दिए जाते थे। इनमें कथित तौर पर पोस्टर लगाना और रेकी करना शामिल था। इसके बदले उन्हें करीब 1,000 से 5,000 रुपये तक दिए जाते थे।
धीरे-धीरे भरोसा बनने के बाद उन्हें संवेदनशील स्थानों और पुलिस थानों की तस्वीरें लेने, हथियारों और ड्रग्स की डिलीवरी जैसे गंभीर काम सौंपे जाते थे। सुरक्षा एजेंसियों ने इस मॉडल को हिंसा की 'गीग इकोनॉमी' जैसा बताया है।
टारगेट किलिंग के लिए भी भुगतान का आरोप
पूर्व NIA अधिकारी के अनुसार, नेटवर्क पर टारगेट किलिंग कराने का भी आरोप है। सुरक्षाकर्मियों की हत्या जैसे गंभीर हमलों के लिए कथित तौर पर तीन लाख रुपये तक भुगतान की पेशकश की जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क में शामिल कई लोग किसी वैचारिक कट्टरता के कारण नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरत या गैंगस्टर संस्कृति के आकर्षण में फंसते थे। इनमें बिरयानी और अदरक बेचने जैसे छोटे कारोबार से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि 12 अगस्त को केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच समन्वय से की गई कार्रवाई ने स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित विध्वंसक गतिविधियों की साजिशों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई।

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