ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने साझा घोषणापत्र पर सहमति जताई। घोषणापत्र जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बैठक में विभिन्न विचारों के बावजूद ब्रिक्स सहयोग के प्रति सभी देशों की साझा प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों को पुराने संस्थानों के जरिए प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने भविष्य की तकनीकों और उनके लिए नियम तय करने में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फैसलों और उनके नतीजों के बीच बनी दूरी को साझेदारी और सामूहिक प्रयासों के जरिए कम करना होगा। उनके मुताबिक, स्वीकार किया गया नई दिल्ली घोषणापत्र साझा संकल्पों को स्पष्ट दिशा देता है और अब इन्हें ठोस परिणामों में बदलना सभी की जिम्मेदारी है।
वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता कायम करने के लिए अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, शी ने कहा कि युद्ध के चलते क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान हुआ है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग की इच्छा जताई।

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