वर्ष 2016 में मलेरिया मुक्त घोषित हो चुका श्रीलंका इन दिनों डेंगू के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है। जनवरी से अब तक देश में 76 हजार से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 53 लोगों की मौत हो चुकी है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकार ने मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान के लिए वायुसेना के सैन्य ड्रोन तैनात किए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सबसे अधिक डेंगू के मामले राजधानी कोलंबो से सामने आए हैं। केवल जुलाई के पहले दो सप्ताह में ही 18 हजार से ज्यादा नए मरीज मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण के अधिकांश मामलों में डेंगू का सबसे खतरनाक वैरिएंट डीईएनवी-2 पाया गया है, जो करीब 75 प्रतिशत मरीजों में मिला है। हाल के चक्रवाती तूफानों के बाद कई क्षेत्रों में जलभराव होने से एडीज मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।
संक्रमण पर नियंत्रण के लिए वायुसेना के ड्रोन छतों और अन्य दुर्गम स्थानों पर जमा पानी की निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की टीमें घरों, स्कूलों और व्यावसायिक परिसरों का निरीक्षण कर रही हैं। अभियान के दौरान अब तक 11 हजार से अधिक मच्छर प्रजनन स्थलों को नष्ट किया जा चुका है, जबकि लापरवाही बरतने वाले 4 हजार से अधिक परिसरों पर जुर्माना लगाया गया है।
डेंगू मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाई गई है और डॉक्टरों की कार्य अवधि भी बढ़ा दी गई है। कुछ अस्पतालों में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुने मरीज भर्ती हो रहे हैं। इसी वजह से हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर पर रहकर उपचार और देखभाल की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल श्रीलंका में डेंगू रोधी टीके का उपयोग शुरू नहीं किया गया है, हालांकि अधिकारी इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त में मानसूनी बारिश कम होने के बाद संक्रमण की रफ्तार में कमी आ सकती है।

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