अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर किसी भी हमले को लेकर कड़ी चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिकी हमले जल्द नहीं रुके, तो अमेरिका को 9/11 जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। इसके कुछ घंटे बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका को चेतावनी जारी की। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, IRGC ने कहा कि यदि युद्ध जारी रहा तो ऐसे अभियान चलाए जाएंगे, जिनके बाद अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और वहां राष्ट्रीय शोक जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
IRGC के इस बयान को 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के संदर्भ में देखा जा रहा है। अमेरिका में राष्ट्रीय शोक की घोषणा आखिरी बार 9/11 हमलों के बाद की गई थी। उस दिन आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकरा दिया गया, जिससे दोनों 110 मंजिला इमारतें ढह गईं। तीसरा विमान वर्जीनिया स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय से टकराया, जबकि चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हमले में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग घायल हुए थे।
इधर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी अमेरिका का रुख बेहद सख्त बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान ने होर्मुज में किसी भी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया, तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों और तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। उन्होंने यह चेतावनी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक पोस्ट में दी।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित युद्धविराम के लिए पहली शर्त यह है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले पूरी तरह बंद करे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने पिछले तीन महीनों में 30 से अधिक जहाजों पर हमले किए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने जून में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करते हुए समुद्री जहाजों को लगातार निशाना बनाया।

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