राजधानी की पटियाला हाउस कोर्ट ने विदेशी और दुर्लभ प्रजाति के जीव-जंतुओं की कथित तस्करी से जुड़े मामले में वियतनाम के नागरिक लाई वान थान को 21 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उस समय गिरफ्तार किया, जब वह बिना आवश्यक अनुमति और वैध दस्तावेजों के बड़ी संख्या में जिंदा विदेशी जीव-जंतु और दुर्लभ पौधे भारत लाने की कोशिश कर रहा था।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उसने कहा था कि वह इन जीव-जंतुओं को अपने निजी उपयोग के लिए भारत लेकर आया था।

कस्टम विभाग की ओर से अदालत में बताया गया कि बरामद किए गए सभी विदेशी जीव-जंतु और पौधे भारत में प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं। इनके आयात के लिए 'साइट्स' (CITES) परमिट, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की मंजूरी, मुख्य वन्यजीव वार्डन का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति अनिवार्य होती है, जबकि आरोपी के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं था।

विभाग ने अदालत को यह भी बताया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। यदि आरोपी को राहत दी जाती है तो अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े संभावित पहलुओं की जांच प्रभावित हो सकती है और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बनी रहेगी। वहीं, बचाव पक्ष ने न्यायिक हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि केवल बरामदगी के आधार पर गिरफ्तारी और जेल भेजना उचित नहीं है। हालांकि, आरोपी द्वारा इन खतरनाक जीवों को निजी उपयोग के लिए लाने का दावा विभाग ने पूरी तरह खारिज कर दिया।

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के निरीक्षण में आरोपी के सामान से हो ची मिन्ह अर्थ टाइगर टैरेंटुला, वियतनाम ब्लू टैरेंटुला, हाइलैंड टैरेंटुला, वियतनामी फॉरेस्ट स्कॉर्पियन, रेनबो मिलीपीड्स (कनखजूरे) सहित सैकड़ों खतरनाक मकड़ियां, बिच्छू और दुर्लभ ऑर्किड व बोन्साई पौधे बरामद किए गए।

अदालत ने माना कि सीमा शुल्क अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आरोपी का न्यायिक हिरासत में रहना आवश्यक है। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे 21 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

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