अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि उनके खिलाफ हत्या की कोई साजिश सफल होती है, तो ईरान को ऐसा जवाब मिलेगा जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने पहले से ऐसे निर्देश दिए हैं, जिनके तहत उनके साथ किसी भी तरह की घटना होने पर ईरान के खिलाफ बेहद बड़ा जवाबी कदम उठाया जाएगा।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब उन्होंने हाल ही में स्वीकार किया था कि वह ईरान की कथित हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। इससे पहले तुर्किये में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी उन्होंने दावा किया था कि ईरान उन्हें अपना प्रमुख निशाना मानता है।

इजरायल की खुफिया जानकारी में भी ट्रंप के खिलाफ कथित नई हत्या की साजिश का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास किसी नए हमले की कोई ठोस जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि ईरान लंबे समय से उन्हें निशाना बनाने की मंशा रखता है। यह बयान उस समय आया है, जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान ट्रंप के खिलाफ नारे लगाए जाने की खबरें सामने आई थीं। ईरान लगातार वर्ष 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की बात करता रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी संविधान के तहत कोई भी राष्ट्रपति ऐसा स्थायी आदेश नहीं दे सकता, जो उसकी मृत्यु के बाद स्वतः लागू होकर किसी देश पर सैन्य हमला शुरू कर दे। किसी भी बड़े सैन्य अभियान का अंतिम निर्णय उस समय के मौजूदा राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होता है, क्योंकि अमेरिकी सेना केवल कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर ही कार्रवाई कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान केवल ईरान को चेतावनी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इसके जरिए वह अपने समर्थकों के बीच खुद को एक मजबूत और सख्त नेता के रूप में प्रस्तुत करने के साथ-साथ ईरान को भी कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि उनके खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब व्यापक स्तर पर दिया जाएगा।

इतिहास में ऐसी रणनीतियों के उदाहरण पहले भी देखने को मिले हैं। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के कथित "डेड हैंड" सिस्टम का जिक्र किया जाता है, जिसके बारे में माना जाता था कि शीर्ष नेतृत्व के समाप्त होने की स्थिति में वह स्वतः जवाबी परमाणु हमला शुरू कर सकता था। इसी तरह द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में एडोल्फ हिटलर ने 'नीरो डिक्री' जारी कर जर्मनी के महत्वपूर्ण ढांचे को नष्ट करने के आदेश दिए थे। वहीं, इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर भी युद्ध की स्थिति में तेल के कुओं में आग लगाने जैसे निर्देश पहले से तय रखने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

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