यूरोप इस समय रिकॉर्ड स्तर की गर्मी और लू की चपेट में है। फ्रांस में पिछले पांच दिनों के दौरान नदियों, झीलों और तालाबों में नहाने या तैरने के दौरान डूबने से 40 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में बड़ी संख्या युवाओं की बताई जा रही है।

भीषण गर्मी के बीच फ्रांस में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। मंगलवार देर रात करीब 1.06 लाख घरों की बिजली गुल हो गई। ग्रिड ऑपरेटरों ने पूरी रात मरम्मत कार्य किया, लेकिन बुधवार देर शाम तक भी लगभग 68 हजार घरों में बिजली बहाल नहीं हो सकी थी।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, तेज गर्मी और उमस से राहत पाने के लिए कई लोग प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज कर असुरक्षित जलाशयों, नदियों और प्रतिबंधित क्षेत्रों में तैरने पहुंच रहे हैं। इसी कारण हाल के दिनों में डूबने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।

फ्रांस की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी ‘मेटेओ फ्रांस’ ने देश के लगभग आधे हिस्से में रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

फ्रांस के प्रधानमंत्री ने आपात बैठक के बाद बताया कि अत्यधिक गर्मी और एयर-कंडीशनिंग की कमी के कारण स्कूलों, रेल सेवाओं और खेल आयोजनों पर भी असर पड़ा है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हीटवेव वर्ष 2003 की उस ऐतिहासिक गर्मी जैसी स्थिति पैदा कर रही है, जिसमें फ्रांस में करीब 15 हजार लोगों की मौत हुई थी।

उधर, ब्रिटेन के मौसम विभाग ने दक्षिणी इंग्लैंड और वेल्स के लिए रेड एक्सट्रीम हीट वार्निंग जारी की है। इन क्षेत्रों में तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानव गतिविधियों से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में तापमान वैश्विक औसत की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। इसके चलते महाद्वीप के कई हिस्से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, जंगलों में आग की घटनाओं और बिजली आपूर्ति संकट का सामना कर रहे हैं।

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