भारत की ओलंपिक पदक विजेता और स्टार भारोत्तोलक मीराबाई अगले महीने गांधीनगर में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में भाग नहीं लेंगी। कंधे की चोट के चलते उन्होंने इस टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया है। उनका मुख्य लक्ष्य इस साल होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में बेहतर प्रदर्शन करना है, जिसके लिए वह कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
भारोत्तोलन ऐसा खेल है जिसमें शरीर पर काफी दबाव पड़ता है, और शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों के लिए फिट रहना बेहद जरूरी होता है। मीराबाई का मानना है कि उनकी शारीरिक स्थिति सर्वोच्च प्राथमिकता है। एशियाई चैंपियनशिप से दूर रहकर उन्हें अपनी चोट से पूरी तरह उबरने और आगामी बड़े मुकाबलों के लिए तैयारी का समय मिलेगा।
उनका अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेल है, जो 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में आयोजित होने हैं। इस प्रतियोगिता में वह अपने वर्ग में उतरेंगी और मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उन्होंने कुल 205 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया था, जो उनके अच्छे फॉर्म का संकेत है।
इसके बाद वह अक्टूबर में होने वाले एशियाई खेल की तैयारी करेंगी। इस बार उन्हें नए वजन वर्ग में उतरना पड़ सकता है, जिसके लिए उन्हें अपने शरीर के वजन में बदलाव करना होगा। एशियाई खेल उनके लिए खास चुनौती भी हैं, क्योंकि अब तक वह इस प्रतियोगिता में पदक हासिल नहीं कर सकी हैं।
यह वर्ष 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के क्वालीफिकेशन की शुरुआत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले टूर्नामेंट उनके लिए अहम साबित होंगे। उनकी अनुपस्थिति में एशियाई चैंपियनशिप के लिए अन्य युवा खिलाड़ी को मौका मिल सकता है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
मीराबाई अब पूरी तरह से अपनी फिटनेस सुधारने और आगामी बड़े आयोजनों के लिए तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, ताकि वह आगे भी देश के लिए बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

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