मराठा शासकों के शासनकाल में सभी धर्मों का सम्मान किया जाता था। इसी कारण इंदौर रियासत के होलकर राज्य में विभिन्न धर्मों के प्राचीन धार्मिक स्थल आज भी शहर में मौजूद हैं। नगर में देवी, गणेश और शिव मंदिरों के साथ-साथ अन्य देवताओं के भी कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं। लोधीपुरा, खजूरी बाजार, कृष्णपुरा और मोरसली गली के राम मंदिर, राजवाड़ा क्षेत्र के समीप स्थित बांके बिहारी और गोपाल मंदिर, तथा कपड़ा मार्केट के पास स्थित नरसिंह मंदिर प्रमुख प्राचीन मंदिरों में शामिल हैं।

ऐसी मान्यता है कि युद्ध के समय होलकर सेना नरसिंह भगवान की प्रतिमा को अपने साथ लेकर जाती थी, ताकि विजय प्राप्त हो सके। युद्ध के बाद प्रतिमा को पुनः मंदिर में स्थापित कर दिया जाता था। माना जाता है कि नरसिंह भगवान की प्रतिमा तत्कालीन होलकर शासक महाराजा यशवंत राव होलकर द्वारा स्थापित करवाई गई थी।

शहर के मध्य स्थित इस नरसिंह मंदिर के नाम पर ही आसपास के बाजार का नाम नरसिंह बाजार पड़ा। वर्ष 1807 में तत्कालीन शासक द्वारा मंदिर के पुजारी को कुछ अधिकार पत्र प्रदान किए गए थे। रियासत काल में मंदिर के आसपास अनाज मंडी हुआ करती थी। परंपरा के अनुसार, शासक दशहरे के अवसर पर मैदान जाने से पहले यहां दर्शन करते थे, और राजपरिवार के सदस्य भी मंदिर में पूजा के लिए आते थे।

रियासत काल में यह मंदिर “लश्करी मंदिर” के नाम से भी जाना जाता था। ‘लश्करी’ शब्द का संबंध सेना या फौज से माना जाता है। यह भी मान्यता है कि युद्ध के दौरान कुलदेवता के साथ नरसिंह भगवान की प्रतिमा को साथ ले जाया जाता था, क्योंकि सेना का विश्वास था कि इससे विजय सुनिश्चित होती है। गोराकुंड क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध जैन मंदिर में भी सेना के लोग दर्शन के लिए जाया करते थे।

नृसिंह भगवान, भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। उनकी जयंती वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका स्वरूप मानव शरीर और सिंह के मुख वाला है, और वे संकट के समय रक्षा करते हैं।

नृसिंह जयंती के अवसर पर इंदौर के विभिन्न मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस प्राचीन मंदिर में तीन दिवसीय उत्सव मनाया जा रहा है, जिसमें नौका विहार और भजन संध्या जैसे आयोजन शामिल हैं। मुख्य आयोजन का समापन गुरुवार को होगा। सुबह पूजन और शाम को भगवान नरसिंह का मुखौटा धारण कर निकाली जाने वाली यात्रा प्रमुख आकर्षण रहती है, जिसमें भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है।

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