पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को दावोस में अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए। इस बोर्ड को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा में शांति स्थापना व पुनर्वास के लिए बनाया।
देश में भारी विरोध
पाकिस्तानी विपक्षी दलों ने फैसले की कड़ी आलोचना की। प्रसिद्ध पत्रकार जाहिद हुसैन ने इसे जल्दबाजी का गलत कदम बताया। उनका कहना है कि पाकिस्तान को ट्रम्प के फैसले का इंतजार करना चाहिए था।
ट्रम्प की जोखिम भरी नीति का समर्थन
हुसैन ने बोर्ड को "अमीरों का क्लब" कहा जो वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा। बोर्ड में इजराइल व अब्राहम समझौते वाले देश शामिल, लेकिन फिलिस्तीनियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं।
चिंताजनक आशंकाएं
हुसैन ने सवाल उठाया- क्या पाकिस्तान हमास को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर करेगा? अमेरिकी जनरल के नेतृत्व में गाजा में फोर्स तैनाती संभव। पाकिस्तानी सैनिकों को फिलिस्तीनी प्रतिरोध से लड़ना पड़ सकता है।

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