इंदौर में बीआरटीएस के हटाने (डिमोलिशन) का काम भी आसानी से नहीं हो रहा। शुरू में कोई ठेकेदार तैयार नहीं हुआ बाद में राजगढ़ स्थित एक एजेंसी ने ढाई करोड़ में ठेका लिया, लेकिन उन्होंने केवल कुछ हिस्से (करीब 200 मीटर) हटाने के बाद काम रोक दिया। एजेंसी ने स्थानीय सब-ठेकेदार को काम सौंपा था निगम के अफसरों ने उसे दफ़्तर बुलाकर स्थिति साफ की और काम फिर से तेज करने के निर्देश दिए हैं।

छह माह पहले हाईकोर्ट ने बीआरटीएस हटाने की अनुमति दी थी। निगम ने टेंडर निकाले  पहले तीन करोड़ मांगे गए, कोई नहीं मिला बाद में राशि कम कर के फिर टेंडर दिया गया, तब ठेकेदार मिला। समस्या यह है कि हटने के बाद जो धातु व रैलिंग निकलती है, उसे बेचकर ठेकेदार को आय होगी और उसकी लागत निकलेगी; पर मार्केट में वे सामान आसानी से नहीं बिक रहे, इसलिए ठेकेदार के लिए यह फायदे का सौदा नहीं बन रहा।


पिछले सप्ताह नेहरू स्टेडियम वाले हिस्से में 200 मीटर रैलिंग हटाई गई, लेकिन काम एक दिन में ही ठप हो गया और मलबा सड़क पर पड़ा है। निगम ने ठेकेदार से कहा है कि दिन के समय बस स्टॉप हटाने का काम किया जाए और रात में रैलिंग हटाई जाए। बस लेन हटाने के बाद अन्य एजेंसियाँ बीआरटीएस को चौड़ा कर के सेंट्रल डिवाइडर बनाएंगी जहाँ ब्रिज बनेंगे, वहाँ डिवाइडर नहीं बनाए जाएंगे। कुल मिलाकर बस स्टॉप हटाने के कारण 11 किलोमीटर हिस्से के काम में लगभग छह माह लग सकते हैं।


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