हर भ्रष्टाचारी अफसर का बंगला कुछ कहता है?

सीबीआई और लोकायुक्त ऐसे अफसरों के यहां रेड डाले तो 100 करोड़ के आसामी निकलेंगे

 जवाबदेही.इंदौर 

एक पौराणिक कथा है, जिसमें एक शक्तिशाली राक्षस रक्तबीज का देवी दुर्गा ने वध किया था। रक्तबीज को भगवान शिव से एक वरदान मिला था कि उसके रक्त की हर बूंद से एक नया रक्तबीज पैदा होगा, जिससे उसे हराना असंभव हो गया था। देवताओं ने उसकी बढ़ती शक्ति से भयभीत होकर मां दुर्गा से सहायता मांगी और मां दुर्गा ने चंडिका के रूप में उसका वध किया, जिसने उसके रक्त को पीने का कार्य किया ताकि नए राक्षस पैदा न हों। वहीं, अब कलयुग में इन घूसखोर दानवों (रक्तबीज) का अंत होता दिख नहीं रहा हैं, क्योंकि ये घूसखोर, रक्तबीज से भी खतरनाक है। पूरे देश में ये रक्तबीज फैल चुके हैं और देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं। वैसे ये भी कह सकते हैं कि अभी रक्तबीज मरा ही नहीं है और उसने घूसखोर-भ्रष्टाचार के रूप में जन्म ले लिया है। 

अभी हाल ही में लोकायुक्त की रेड में सेवानिवृत्त धर्मेंद्र सिंह चौहान के इंदौर और ग्वालियर और उज्जैन के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति मिली। 4 किलो सोना, 7 किलो चांदी और 2 करोड़ नकदी है। वैसे सिर्फ धर्मेंद्र सिंह चौहान जैसे कई घूसखोर अफसर हैं, जो देश को दीमक की तरह चट करते जा रहे हैं। 

वैसे मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग में कई ‘बिच्छु’ है, जो 100-100 करोड़ के आसामी बन चुके हैं। इंदौर, जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर जैसे शहरों के जिला आबकारी अधिकारी की महीने की अवैध कमाई (रिश्वत) 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाती है। वहीं, इन बड़े जिलों से छोटे जिलों का जिला आबकारी अधिकारी की अवैध कमाई महीने की 60 से 70 लाख के आसपास हो रही है! हर जिला आबकारी अधिकारी धनकुबेर बना बैठा है? वर्तमान अधिकारियों के पास भी अकूत संपत्ति हैं और जो रिटायर्ड हो चुके हैं, उनके पास भी रिश्वत के रूप में कमाया हुआ अवैध धन पड़ा है। लोकायुक्त और ईडी पूरे मध्यप्रदेश के जिला आबकारी अधिकारियों के गिरेबां पर हाथ डालें तो रिश्वतखोर अफसरों के पास से हजारों करोड़ रुपए नकदी और इतने का ही सोना-चांदी बरामद हो सकता है। कहा जा रहा है कि देश में नकदी का संकट है! संकट तो होगा ही, क्योंकि भ्रष्टाचारियों के गद्दे, बैग और अलमारियों में करोड़ों रुपया भरा पड़ा है। भ्रष्टाचारी सिर्फ अकेले मध्यप्रदेश में नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में इनकी तादाद् कुकरमुत्ते की तरह बढ़ रही है, जो देश के लिए चिंता का विषय है। क्योंकि सरकारी विभागों में बैठे ये अफसर खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे हैं और देश गर्त में जा रहा है।

दरअसल, सरकार को अब देश के अंदर ध्यान देने की आवश्यकता है। देश का विकास काफी हो चुका है और हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से निपटने के लिए कई अफसर और मंत्री हैं, जो समय-समय पर आने वाली समस्याओं को हल करते रहते हैं। लेकिन देश के अंदर जो हालात बिगड़ रहे हैं, उन्हें कौन सुधारेगा?


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