मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के जिम्मेदारों ने अपने चेहते को काम देने के लिए टेंडर के अपने अलग ही नियम गढ़ लिए। हद तो यह है कि इसकी शिकायत कर्ताधर्ताओं को करने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। ऐसे में साफ है कि करीब 10 करोड़ रुपये के काम के टेंडर में सब कुछ मिलीभगत से किया गया। 

मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने टेंडर की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त को ही पूरा नहीं करने वाली चहेती फर्मों को ना सिर्फ क्वालिफाई किया बल्कि उनको काम देने की पूरी तैयारी भी कर ली। दरअसल, कॉर्पाेरशन ने जुलाई 2025 में प्रदेश में अपने करीब 275 के आसपास वेयरहाउस के परिसरों में सड़क, साइनज, रोड सेफ्टी और रेट्रो-रिफ्लेक्टिव शीट लगाने जैसे कामों के लिए टेंडर बुलाए गए। यह टेंडर तीन साल तक संबंधित कार्य के रेट कॉन्ट्रेक्ट के लिए है। इस टेंडर में पहली शर्त यह रखी गई कि फर्म मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी में पंजीकृत होना चाहिए। हद तो यह है कि जिम्मेदारों ने इस शर्त को पूरा नहीं करने वाली फर्मों एवेन्यू ग्राफिक्स, सत्यम ग्राफिक्स और अबुल फैज को क्वालिफाई कर दिया। इसका तर्क दिया गया कि पीडब्लयूडी के एनआईटी की शर्त के अनुसार पंजीयन के लिए आवेदन करने वाली फर्मों को भी क्वालिफाई किया जा सकता है। वहीं, जानकारों के अनुसार रजिस्ट्रेशन करने वाली फर्म को तब ही योग्य माना जा सकता है, जबकि संबंधित टेंडर फार्म में इसका जिक्र किया गया हो। साथ ही उसमें यह भी बताना होगा कि टेंडर से पहले आवेदन किया जाना चाहिए या फिर बाद में कब तक। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि कॉर्पोरेशन के टेंडर में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाली फर्मों के भी पात्र होने से संबंधित कोई शर्त नहीं लिखी गई। 

इन नियमों का भी खुला उल्लंघन 

यही नहीं इन फर्मों के पास ओईएम (Original Equipment Manufacturer) का इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट भी नहीं था। बावजूद इसके इन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाया गया और बाद में उनसे दस्तावेज लेकर खानापूर्ति कर दी गई। वहीं, एक क्वालिफाई निविदाकार अबुल फैज ने टेंडर जारी होने के तारीख के बाद पीडब्ल्यूडी में रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया, जो कि निविदा में शामिल होने के लिए हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट माना जाता है। पीडब्ल्यूडी के नियमों के अनुसार भी यह टेंडर जारी होने के पहले का जरूरी हैं। 

थ्री एम इंडिया के वेंडरों को बाहर करने पर सवाल

एक हालिया टेंडर में छह वेंडरों ने भाग लिया, जिनमें तीन वेंडर थ्री एम इंडिया के और तीन वेंडर ओराफिल के थे। कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने एक पेपर के आधार पर थ्री एम इंडिया के सभी वेंडरों को टेंडर से बाहर कर दिया, जबकि उनके पास PWD का रजिस्ट्रेशन और अन्य सभी आवश्यक शर्तें पूरी थीं। जानकारों का कहना है कि सरकार का पैसा बचाने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कभी-कभी हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं। इससे कई फर्में भाग लेती हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। वहीं, अब सवाल उठ रहे हैं कि यह निविदा सामान्य परिस्थितियों में 20 से 25 प्रतिशत कम दरों पर मंजूर की जानी चाहिए थी, लेकिन कथित सांठगांठ के चलते इसे केवल ढाई प्रतिशत कम दर पर जल्दबाजी में खोल भी दिया गया है और आगे अनुबंध की प्रक्रिया जारी है।  

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