जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक
पुलिसवाले भी आम आदमी है...,उन्हें भी जुआं खेलने का हक है...!भले ही वो शहरभर में जुआरियों और बदमाशों पर कार्रवाई करते हो, लेकिन उनका मन भी हिलौरे मारता है आम आदमी की तरह जिंदगी बसर करने का...। पुलिस वाला शराबी हो, जुआरी हो उसका कोई दोष नहीं...।
इस सप्ताह एरोड्रम थाना क्षेत्र की पुलिस ने एक जुए के अड्डे पर दबिश दी तो हड़कंप मच गया...। कार्रवाई के दौरान जुआरियों के साथ चार पुलिसवाले भी धराई में आ गए। जिस तरह से पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी सेटिंग में लग जाते हैं, ठीक उसी तरह इन चारों पुलिसवालों की गत हुई। इन्होंने संबंधित थाने के टीआई को नेताओं से फोन लगवाए, लेकिन टीआई ने इन पर जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई कर अंदर ही रखा और बाद में देर रात थाने से जमानत पर छोड़ दिया। कम से कम इन चार पुलिसवालों को ये तो समझ में आ गया होगा कि आम आदमी जब इनकी पकड़ में आता है तो उस पर क्या बीतती होगी?
अब हम विजयनगर पुलिस थाने की बात करते हैं...। इस थाने में डीजल बेच रहे स्टूडेंट की पुलिस ने कैबिन में बंद कर प्लास्टिक के पाइप से जमकर पिटाई की। आरोप लग रहे है कि पुलिस के जवान थाना प्रभारी के सामने ही छात्र की धुनाई कर रहे थे और उसके परिजन से 50 हजार रुपए की मांग की गई बाद में उसे 30 हजार रुपए लेकर छोड़ा गया। अब टीआई साहब कह रहे है आरोपी झूठ बोल रहा है, उस पर अवैध डीजल बेचने का आरोप है और पिटाई भी नहीं हुई। पुलिस के कई रूप सामने आते रहते हैं। थानों पर परामर्श केंद्र चल रहे हैं, जहां पति-पत्नी के विवाद ज्यादा पहुंच रहे हैं, परामर्श भी सशुल्क ही दिया जा रहा है! अब सशुल्क कैसा..., रिपोर्ट दर्ज करानी है या नहीं, चमकाना है या नहीं.., ये सब चलता आ रहा है। दोनों पक्ष थाने पहुंच रहे हैं और दोनों से आवेदन लेकर समझाने के बाद दोनों पक्षों को कॉल कर अलग-अलग समय बुलाकर थाने के बाहर शुल्क तय कर परामर्श दिया जा रहा है। दोनों पक्षों की मजबूरी रहती है और वह समझते हैं कि पुलिस मेरी तरफ से बोल रही है..., लेकिन हकीकत में पुलिस को मतलब सिर्फ रुपयों से है..., तुम परिवार के साथ रहो या अलग हो जाओ, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। आला अधिकारियों के सामने दो-चार उदाहरण फैमिली के मिलाने के बता दिए... हो गया काम। हां, वो बात अलग है कि इन्हें मिलाने का भी शुल्क लिया गया है, लेन-देन में मध्यस्थता निभाने के लिए वकील साहब रहते हैं..., क्योंकि डील इनके माध्यम से ही होती है । पुलिस वालों के कई रूप देखने को मिलते हैं। और कहा भी जाता है कि पुलिस वालों से न तो दोस्ती अच्छी न दुश्मनी। रंग बदलने में काफी माहिर होते है ं।
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