जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकारी अफसरों से काफी खफा है और अफसरों की क्लास ले रहे हैं...। नाराज है और कह रहे हैं कि भ्रष्टों को बर्खास्त करो और गरीबों का पैसा खाने वालों को तोड़ दो...? अब सवाल उठता है कि कौन भ्रष्टों को बर्खास्त करेगा और कौन गरीबों का पैसा खाने वालों को तोड़ेगा...?

प्रदेश में सरकार तो आपकी है सरकार...! फिर किसी को आदेश न देकर आप ही भ्रष्टों को बर्खास्त कर सकते हो। मध्यप्रदेश के भ्रष्ट अफसरों की लंबी लिस्ट है...। प्रतिदिन कहीं न कहीं कोई न कोई अफसर, पटवारी, डॉक्टर, रिश्वत लेते पकड़ा रहे हैं..., निलंबन करने के बाद उनका विभाग बदल दिया जा रहा है, क्यों नहीं इनके मकानों को तोड़ा जाता..? एक उदाहरण ्रदेश सरकार बता दे कि मध्यप्रदेश में किसी भ्रष्ट अफसर का मकान तोड़ा हो...। 

घूसखोर अफसर ये बात भलीभांति जानते हैं कि अगर वो रिश्वत लेते पकड़ाए तो ज्यादा से ज्यादा निलंबन होगा और ये नहीं तो दूसरा विभाग मिल जाएगा..., फिर वहां जाकर भ्रष्टाचार ही तो करना है...। भ्रष्टाचारियों को इधर से उधर घूमाने से प्रदेश क्या पूरे देश में कभी भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। सारे सबूत आपको मिल जाते हैं रिश्वतखोर को पकड़ने के दौरान...तो इतनी शिथिलता क्यों इनके साथ बरती जाती है। ये बेशर्म अफसर जब पकड़ाते हैं तो गर्दन झुका लेते हैं और फिर  बहाल होने के बाद अपनी कारस्तानी से बाज नहीं आते। इसलिए प्रदेश शासन को करप्शन के मामले में पारदर्शिता रखना होगी। भ्रष्टाचारी कभी न देश के हुए और न कभी होंगे। इनका सिर्फ एक ही मकसद होता है पैसा कमाना..., जिसके लिए ये लोग प्रदेश के विकास कार्यों को कमजोर बनवा रहे हैं...।   कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर के नए बने सरवटे बस स्टैंड का उद््घाटन किया था। उद््घाटन के दौरान तब इस बस स्टैड के निर्माण में की गई धांधली को उजागर किया गया था...। क्या हुआ? मामला दो-चार दिन के बाद रफा-दफा कर दिया गया..।  प्रदेश सरकार से जनता न्याय चाहती है। जनता को प्रदेश की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि उसे खाने-कमाने से ही फुर्सत नहीं है। उन्हें दुख इस बात का है कि अगर वह कोई काम कराने सरकारी विभागों में जाते हैं तो उनका काम बगैर दिए होता ही नहीं है। प्रदेश सरकार महिलाओं के लिए न्याय को लेकर सजगता की बात करती हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए परामर्श केंद्र खोले गए हैं...। परामर्शदाता पीड़ितों को परामर्श तो देते हैं कि किसी की गृहस्थी ना बिगड़े, लेकिन बातों ही बातों में खर्चा-पानी मांगने लग जाते हैं। पीड़ित और फरियादी दोनों की जेब पर परामर्शदाताओं की नजर लगी रहती है। ऐसे कई किस्से है प्रदेश के सरकारी विभागों के...।       अगर हकीकत में प्रदेश सरकार के ईमानदार आला अफसर भ्रष्टों को ढूंढने लगेंगे तो प्रदेशभर के सरकारी दफ्तर खाली हो जाएंगे...। ...और होना भी चाहिए... तभी तो बेरोजगारों को काम करने का अवसर मिलेगा...। वैसे भी प्रदेश में सरकारी नौकरियां पाने के लिए बेरोजगार अपने नंबर आने की प्रतीक्षा कर रहा है...तो क्यों नहीं प्रदेश की सरकार भ्रष्टों को बर्खास्त करती और प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाती...। कथनी और करनी में काफी फर्क होता है...।

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