बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में मंगलवार रात करीब 8:30 बजे नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया। नाव पर करीब 30 लोग सवार थे, जो भोज में शामिल होने जा रहे थे। नाव की जर्जर हालत और क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने के कारण वह गंगा नदी से जुड़े जलक्षेत्र में पलट गई। हादसे में 20 से अधिक लोगों के डूबने की जानकारी सामने आई।

स्थानीय लोगों ने मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में बचाव कार्य शुरू किया। अब तक 13 बच्चों के शव बरामद किए गए, जिनमें नौ बच्चियां और चार बच्चे शामिल हैं। छह घायलों को इलाज के लिए पटना के एनएमसीएच भेजा गया। हादसे के करीब 10 घंटे बाद भी एसडीआरएफ की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी थी।

हादसे में अपने परिवार के सात बच्चों को खोने वाले एक ग्रामीण ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले नाव की खराब हालत को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन मरम्मत का आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों के अनुसार, बाढ़ के दौरान प्रशासन ने यह नाव ग्रामीणों को उपलब्ध कराई थी।

घटना के बाद जिला प्रशासन ने राघोपुर के अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष से जवाब मांगा है। अगले आदेश तक दोनों के वेतन पर रोक लगा दी गई है। मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता के साथ अन्य सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक मदद दी जा रही है। प्रधानमंत्री राहत कोष से भी दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की गई है।

इस हादसे ने नावों की सुरक्षा, समय पर मरम्मत और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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