संपादकीय

 अभी कुछ दिन पहले मैं यूरोपियन देशों में घूमने के लिए परिवार सहित गया था। वहां पर घूमते हुए कुछ पर्यटक मिले, जो कि यूरोपियन देशों के थे। उनसे बातचीत हुई तो उनके द्वारा यह बताया गया कि वह इंडिया घूमने गए थे। जयपुर, आगरा, उज्जैन और मुंबई जैसी चार जगहों पर ज्यादातर लोगों ने घूमने की बात कही। लेकिन दुखद ये कि उन्होंने हमारे देश के लोगों की छवि बहुत खराब पेश की। 

उनका कहना था कि आपके देश में लोग ट्रैफिक नियमों का पालन ही नहीं करते और ज्यादातर लोग चीटर है। 

उनका कहना था कि इंडिया में पर्यटकों से 500 का सामान 10 हजार रुपए में बेचने की कोशिश करते हैं। ऑटो रिक्शा, टैक्सी चालकों द्वारा बदतमीजी करने की बात प्रमुखता से कही गई। उन्होंने पैदल चलने की जगह सड़कों पर न होना भी बताया। 

मैंने यूरोप में देखा कि यदि कोई व्यक्ति सड़क पर पैदल चल रहा है और सड़क पार करना चाहता है तो चालक खुद ही वाहन की गति पर ब्रेक लगा लेता है और पैदल चलने वालों को प्राथमिकता देता है। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि इंडिया में फिमेल को गलत नजरों से देखा जाता है। इस तरह से हमारे देश की छवि वहां पेश की जा रही है.... और यही कारण है कि विदेशी पर्यटकों का इंडिया से मोह भंग हो रहा है। वहीं, यदि हम सिर्फ इंदौर की बात करें तो यहां विदेशी क्रिकेटर महिला से छेड़छाड़ हो चुकी है और अभी हाल ही में गांधी हॉल में जर्मन से आई महिला घूमने आई थी, जहां एक सिक्योरिटी गार्ड ने उनके साथ छेड़छाड़ की।

ऐसी हरकतों की वजह से ही विदेशों में भारतीय पर्यटकों को भी हीन भावना से देखा जाने लगा है। जो पर्यटक इंडि़या घूमने आए होते हैं, और उनके साथ जो हरकतें हमारे देश के लोग करते हैं तो यहां की छवि उनके मन में होती ही है, और जब कोई भारतीय पर्यटक विदेश घूमने जाता है तो विदेशी लोग उन्हें हीन भावना से देख रहे होते हैं, क्योंकि उनके मन में खराब छवि तो हमारे यहां के लोगों की है ही और पूरे इंडिया की छवि उनकी नजरों में गलत बन रही है।

हमारे यहां से गए पर्यटक विदेशों की होटलों में जो हरकत करते हैं, उससे भी हमारे देश की छवि खराब हो रही है। मैं वहां एक होटल में नाश्ता कर रहा था, जहां खासकर भारतीयों के लिए लिखा है कि नाश्ता करो, साथ नहीं ले जा सकते हैं। दरअसल, वहां की होटलों में हमारे यहां के लोग जाते हैं, तो जो नाश्ता बचता है, उसे भी पैक करके साथ ले जाते हैं। इसके अलावा ज्यादातर लोग भारत के कुछ व्यंजन वहां ले जाते हैं और होटल में खाने लग जाते हैं, जो उन्हें मंजूर नहीं होता है। इसलिए वहां भारतीयों के लिए नियम बनाए गए हैं। 

स्विटजरलैंड की होटल के नियम

स्विट्जरलैंड की होटल के नियम हैं, जो खास भारतीयों के लिए ही है। भारतीयों को धीमी आवाज में बात करने की हिदायत दी गई है। साथ ही खाने को लेकर भी सख्य नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है।

खाते समय इन बातों का भारतीयों को रखना होगा ध्यान

पहला नियम है, नाश्ते का बुफे सुबह 7:30 बजे से 10:30 बजे तक खुला रहता है। बुफे में उपलब्ध सभी खाद्य पदार्थ ताजा तैयार किए जाते हैं और स्थानीय उत्पादकों से प्राप्त होते हैं। कृपया भोजन अपने साथ न ले जाएं, क्योंकि यह केवल नाश्ते के लिए है। यदि आपको लंच पैक चाहिए, तो आप सेवा कर्मियों से ऑर्डर कर सकते हैं और उसका भुगतान कर सकते हैं।

दूसरा, कृपया ध्यान दें कि अन्य मेहमान भी अच्छे बुफे का आनंद लेना चाहते हैं। केवल उपलब्ध कराई गई कटलरी का ही उपयोग करें। तीसरा, हमारा रेस्तरां दोपहर और रात्रि भोजन के लिए खुला है। हम अलग-अलग तरह की डिशेज और शाकाहारी भोजन भी उपलब्ध कराते हैं। यदि आप दो या अधिक लोगों के बीच भोजन साझा करना चाहते हैं, तो प्रत्येक अतिरिक्त व्यक्ति के लिए सेवा और प्लेट के लिए CHF 5 और ड्रिंक के लिए CHF 1 अलग से शुल्क लिया जाएगा।

देश की छवि सुधारना हम 
सबकी जिम्मेदारी

विदेश यात्रा के दौरान यह अनुभव हुआ कि भारत को लेकर दुनिया की नजर में हमारी छवि केवल हमारी संस्कृति, इतिहास और विकास से नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के व्यवहार से भी बनती है। यदि कोई विदेशी पर्यटक भारत में ट्रैफिक नियमों की अवहेलना, टैक्सी-ऑटो चालकों की मनमानी, पर्यटकों से ज्यादा कीमत वसूलने, महिलाओं के प्रति अभद्र व्यवहार और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था का अभाव देखता है, तो वह अपने देश लौटकर भारत की वही तस्वीर लेकर जाता है। हम लोग जो टीवी और सोशल मीडिया पर देखते हैं कि दुनिया भारत को विश्वगुरु की निगाह से देख रही है तो यह हमारा भ्रम है...। सच्चाई, वहां व्यक्तिगत रूप से जाने पर नजर आती है।

देश की छवि सुधारने के लिए सरकार और प्रशासन के साथ-साथ हर नागरिक को अपनी जवाबदेही समझनी होगी। पर्यटकों को ठगना बंद करना होगा और होटल, टैक्सी, ऑटो, बाजार तथा पर्यटन स्थलों पर पारदर्शी दरें और सभ्य व्यवहार सुनिश्चित करना होगा। महिलाओं और विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी।

हमें ट्रैफिक नियमों का पालन केवल चालान के डर से नहीं, बल्कि अपनी नागरिक जिम्मेदारी समझकर करना चाहिए। सड़क पार करने वाले पैदल यात्री को प्राथमिकता देना, स्वच्छता बनाए रखना और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन दिखाना हमारी आदत बननी चाहिए। 

विदेश जाने वाले भारतीय पर्यटकों को भी यह समझना होगा कि वे केवल अपना नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। होटल के नियमों का पालन करना, भोजन की बर्बादी न करना और ऐसी हरकतों से बचना जरूरी है, जिनके कारण विशेष रूप से भारतीयों के लिए अलग नियम बनाने पड़ें।

भारत की पहचान महान संस्कृति और “अतिथि देवो भव” से है। अब जरूरत है कि हमारा व्यवहार भी इस पहचान के अनुरूप हो। देश की छवि सरकार नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिक अपने रोजमर्रा के आचरण से बनाते हैं।

-जगजीतसिंह भाटिया

प्रधान संपादक





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