इंदौर। नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में इंदौर की डॉ. अम्बेडकर नगर कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी गोकुल उम्र (21) को दो अलग-अलग धाराओं में 20-20 साल के सश्रम कारावास की सजा दी। कोर्ट ने उस पर कुल 12 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

उपनिदेशक अभियोजन राजेन्द्र सिंह भदौरिया के अनुसार, थाना बड़गोंदा के विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2026 में 24 अगस्त 2026 को यह फैसला सुनाया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक ज्योति अजमेरा ने मामले की पैरवी की।

मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई, जब पीड़िता के पिता ने थाने में बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी 3 अक्टूबर की सुबह करीब 9 बजे स्कूल जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन शाम 4 बजे तक वापस नहीं लौटी। स्कूल पहुंचने पर वह बंद मिला, क्योंकि उस दिन छुट्टी थी। काफी तलाश के बाद भी बेटी का पता नहीं चला, जिसके बाद गुमशुदगी दर्ज कराई गई।

पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 415/2025 के तहत बीएनएस की धारा 137(2) में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान 17 दिसंबर 2025 को पुलिस ने पीड़िता को दस्तयाब किया।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर उज्जैन ले गया था। आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। इसके बाद पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 87, 64(2)(एम) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5एल/6 भी जोड़ी।

जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण, मौका-नक्शा और गवाहों के बयान सहित अन्य आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद न्यायालय में चालान पेश किया।

अभियोजन की ओर से कोर्ट में 8 गवाहों के बयान कराए गए। साक्ष्यों और अभियोजन के पक्ष को आधार मानते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी पाया और दोनों धाराओं में 20-20 साल के सश्रम कारावास के साथ 12 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।

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