इंदौर के चर्चित 100 करोड़ रुपये के ड्रेनेज लाइन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में 20 हजार पेज से ज्यादा का चालान पेश किया है। मामले में 32 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें इंजीनियर, लेखा विभाग के कर्मचारी और ठेकेदार शामिल हैं। वहीं, जेल में बंद दो आरोपियों की जमानत याचिकाएं कोर्ट ने खारिज कर दी हैं।

ED के चालान में तत्कालीन चीफ इंजीनियर अभय राठौर को मुख्य आरोपी बताया गया है। आरोप है कि बिना काम कराए फाइलों को मंजूरी दिलाने और लेखा विभाग के कर्मचारियों की मदद से बिल पास कराने में उनकी भूमिका रही।

जांच के मुताबिक, करीब चार साल की अवधि में 100 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों से जुड़ी कथित फर्जी फाइलें तैयार कर भुगतान के लिए लेखा विभाग को भेजी गईं। मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। इसी दौरान नगर निगम के एक अधिकारी की कार से घोटाले से जुड़ी फाइलें गायब होने की बात सामने आई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच आगे बढ़ने पर कथित घोटाले की परतें खुलती गईं।

बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले की जांच शुरू की। ED ने आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई की। पिछले साल अगस्त में आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्ति, बैंक खाते और लॉकर फ्रीज किए गए थे। इसके बाद संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू हुई। अब तक करीब 59 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।

मुख्य आरोपी अभय राठौर ने घोटाले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह लंबे समय तक निलंबित रहे और बहाली के बाद उन्हें मामले में आरोपी बना दिया गया। उनका दावा है कि जिन फाइलों के आधार पर भुगतान हुआ, उन पर वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर थे।

अब ED कोर्ट में आरोपों को साबित करने के लिए सबूत पेश करेगा। फिलहाल इस मामले में तीन आरोपी जेल में बंद हैं।

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