चीनी के बढ़ते दामों के बीच जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए बांदा में प्रशासन ने शनिवार को तीन बड़े कारोबारियों के गोदामों की जांच की। नगर मजिस्ट्रेट दिनेशचंद्र के नेतृत्व में खाद्य विभाग की टीम ने अचानक निरीक्षण कर चीनी के स्टॉक का सत्यापन किया। तीनों प्रतिष्ठानों पर कुल 1957.50 कुंतल चीनी का भंडार मिला।
टीम ने छावनी चौराहा स्थित मैसर्स तुलसीदास साहू के गोदाम की जांच की। यहां प्रोपराइटर तुलसीदास साहू की मौजूदगी में 2165 बोरी यानी 1082.50 कुंतल चीनी स्टॉक में मिली। इसके बाद सब्जी मंडी के पास मैसर्स सीताराम द्वारिका दास के प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया गया, जहां प्रोपराइटर कपिल गुप्ता की मौजूदगी में 400 बोरी यानी 200 कुंतल चीनी मिली।
तीसरी कार्रवाई कैथी बाजार स्थित मैसर्स ओम एंड कंपनी में की गई। यहां प्रोपराइटर विवेक अग्रवाल की मौजूदगी में 1350 बोरी यानी 675 कुंतल चीनी का स्टॉक दर्ज किया गया।
अधिकारियों ने सभी व्यापारियों को भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर प्रत्येक शुक्रवार को चीनी के स्टॉक की अनिवार्य घोषणा करने के निर्देश दिए। घोषित स्टॉक का साप्ताहिक सत्यापन भी कराया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जमाखोरी या कालाबाजारी पाए जाने पर संबंधित व्यापारियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी अमित आसेरी ने आम लोगों से अपील की कि प्रदेश में फिलहाल चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर चीनी की कमी या उपलब्धता को लेकर प्रसारित हो रही अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपनी जरूरत के अनुसार खुले बाजार से चीनी आसानी से खरीद सकते हैं।
जिलाधिकारी ने थोक व्यापारियों से भारत सरकार द्वारा जारी और सार्वजनिक वितरण के लिए निर्धारित चीनी के स्टॉक की स्थिति संबंधित पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट करने को कहा। उन्होंने बताया कि थोक कारोबारियों के स्टॉक की जांच कराई जाएगी और जमाखोरी में संलिप्तता मिलने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई होगी। प्रशासन की ओर से कालाबाजारी रोकने के लिए ऐसी जांच आगे भी जारी रहेगी।

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