पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका की सैन्य तैयारियों को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के साथ संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर सिर्फ मौजूदा सैन्य अभियान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे अमेरिका की भविष्य की सैन्य क्षमता और वैश्विक रणनीतिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। उन्नत मिसाइल प्रणालियों के लगातार इस्तेमाल से हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विश्लेषकों के मुताबिक, लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रहने की स्थिति में अमेरिका के लिए अपने आधुनिक हथियारों का पर्याप्त भंडार बनाए रखना चुनौती बन सकता है। ऐसे हालात में भविष्य में चीन या उत्तर कोरिया जैसे संभावित प्रतिद्वंद्वियों के साथ किसी बड़े संघर्ष की स्थिति पैदा होने पर उसकी सैन्य तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि संघर्षविराम का दौर समाप्त हो चुका है। ऐसे में आने वाले समय में सैन्य गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिकी सेना ने लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली मिसाइलों और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इसी वजह से थाड (THAAD) बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर, पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के भंडार पर दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के शुरुआती दौर में थाड इंटरसेप्टरों का लगभग 50 प्रतिशत, पैट्रियट इंटरसेप्टरों का करीब 50 प्रतिशत और टॉमहॉक मिसाइलों का लगभग 30 प्रतिशत तक इस्तेमाल किया जा चुका था। इसके बाद सैन्य अभियान की गति कुछ धीमी हुई, जिससे हथियारों की खपत कम हुई। हालांकि, इस्तेमाल हुए हथियारों की भरपाई अब भी अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार से हो रही है।
भविष्य की सैन्य क्षमता पर असर की आशंका
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि आधुनिक हथियारों की खपत इसी तरह जारी रही, तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है। उनका कहना है कि उन्नत मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन सीमित क्षमता से हो रहा है, इसलिए इनके भंडार को पहले के स्तर तक पहुंचाने में समय लगेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान उत्पादन क्षमता के तहत हर महीने सीमित संख्या में ही नई टॉमहॉक और पैट्रियट मिसाइलों का निर्माण हो रहा है, जबकि वर्ष 2026 में थाड इंटरसेप्टरों की नई आपूर्ति भी तय नहीं है। अनुमान है कि यदि मौजूदा हालात बने रहे, तो युद्ध-पूर्व स्तर तक मिसाइलों का भंडार दोबारा तैयार करने में तीन से पांच वर्ष लग सकते हैं। उनका कहना है कि अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, इसलिए इनकी तेजी से भरपाई संभव नहीं है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अतिरिक्त रक्षा बजट को अब तक मंजूरी नहीं मिलने से उत्पादन सामान्य गति से चल रहा है। यही कारण है कि नई आपूर्ति बढ़ाने में समय लग सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि वह रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) के तहत मिसाइल निर्माण से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज किया जा रहा है, ताकि उत्पादन में तेजी लाई जा सके। इसके अलावा जर्मनी और यूक्रेन जैसे सहयोगी देशों में पैट्रियट मिसाइलों के स्थानीय उत्पादन की दिशा में भी काम किया जा रहा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों का प्रभाव दिखाई देने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।
अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि उसके पास अपने राष्ट्रीय हितों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता उपलब्ध है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय तक आधुनिक मिसाइल प्रणालियों का इसी स्तर पर उपयोग जारी रहा, तो भविष्य में किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में अमेरिका को नई रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मौजूदा सैन्य अभियान के साथ-साथ हथियारों के संतुलित उपयोग और उत्पादन क्षमता बढ़ाना भी अमेरिका के लिए अहम प्राथमिकता बन गया है।

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