अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शिकागो में आयोजित ‘ओबामा प्रेसिडेंशियल सेंटर’ के उद्घाटन समारोह में लोकतंत्र और नागरिक मूल्यों पर जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ऐसी नीतियों की आलोचना की, जिन्हें उन्होंने अमेरिकी आदर्शों के विपरीत बताया।
इतिहास का उल्लेख करते हुए ओबामा ने कहा कि अमेरिका की पहचान ऐसे देश के रूप में रही है जहां न तो किसी राजा का शासन है और न ही कोई व्यक्ति प्रजा की तरह माना जाता है। उनके इस बयान को हाल के महीनों में देशभर में हुए ‘नो किंग’ विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उन्होंने मिनियापोलिस के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि वहां के नागरिकों ने कठिन परिस्थितियों और भीषण ठंड के बावजूद अपने पड़ोसियों तथा जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए एकजुट होकर काम किया। इसे उनकी ओर से आव्रजन नीतियों पर परोक्ष टिप्पणी माना जा रहा है।
ओबामा ने विश्वास जताया कि नया प्रेसिडेंशियल सेंटर लोगों को लोकतंत्र के महत्व और उसकी ताकत को समझने का अवसर देगा। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1985 में 23 वर्ष की उम्र में वह एक सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में शिकागो आए थे। इसी क्षेत्र में उनकी मुलाकात मिशेल ओबामा से हुई और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की यात्रा आगे बढ़ी।
समारोह को संबोधित करते हुए मिशेल ओबामा ने अपने पति के नेतृत्व, दूरदर्शिता, नैतिक साहस और कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि कौन कितना अमेरिकी है।
कार्यक्रम में अमेरिका के कई पूर्व राष्ट्रपतियों और उनकी पत्नियों सहित बड़ी संख्या में अतिथि मौजूद रहे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, वर्तमान राष्ट्रपति को इस समारोह का निमंत्रण नहीं दिया गया था। यह केंद्र शुक्रवार से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।

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