भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने अपने आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वर्ष 2026 के अंत तक हस्ताक्षर करने और निवेश, सुरक्षा तथा कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

यह सहमति फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई बैठक में बनी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेताओं ने 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की और लंबे समय से चर्चा में रहे मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत किया। मंत्रालय ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि समझौते के शीघ्र हस्ताक्षर और क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

नेताओं का मानना है कि यह समझौता व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगा तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा।

बैठक के बाद उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर किए जाएंगे। साथ ही, दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए निवेश समझौते पर भी वार्ता तेज की जाएगी।

व्यापार के अलावा सुरक्षा, रक्षा और आधारभूत ढांचा कनेक्टिविटी भी चर्चा के प्रमुख विषय रहे। नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। यह पहल बंदरगाहों, रेल नेटवर्क और लॉजिस्टिक ढांचे के माध्यम से भारत को मध्य पूर्व होते हुए यूरोप से जोड़ने का लक्ष्य रखती है।

तीनों नेताओं ने संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा की प्रगति की भी समीक्षा की। इसके तहत प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह एजेंडा भारत और यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

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