इंदौर में दो वर्षीय बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का आरोप है कि एक निजी क्लिनिक में उपचार के दौरान बरती गई कथित लापरवाही के कारण बच्ची की जान चली गई। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए प्रशासन की अनुमति से मौत के चार दिन बाद बच्ची के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया।
परिवार के अनुसार, बच्ची को 27 मई को उल्टी और दस्त की सामान्य शिकायत हुई थी। इसके बाद उसे एक निजी क्लिनिक में इलाज के लिए ले जाया गया। अगले दिन उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि क्लिनिक में बच्ची को कई बोतल ड्रिप चढ़ाई गई। उपचार के दौरान उसकी स्थिति बिगड़ने लगी और धड़कनें तेज हो गईं। परिवार ने डॉक्टर से चिंता जताई तो उन्हें भरोसा दिलाया गया कि बच्ची जल्द ठीक हो जाएगी। बाद में उसे घर ले जाने की सलाह दी गई।
बताया गया कि घर पहुंचने के बाद रात में बच्ची के हाथ-पैर और होंठ नीले पड़ने लगे। अगले दिन उसे एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए बाल चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
घटना के बाद परिजनों ने उपचार पर सवाल उठाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मौत के कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम आवश्यक बताया। इसके बाद परिवार ने एसडीएम से अनुमति प्राप्त की।
मंगलवार को पुलिस की मौजूदगी में श्मशान घाट से बच्ची का शव निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। पांच डॉक्टरों की विशेष टीम ने पोस्टमॉर्टम किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम को बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया।
बेटी की मौत के बाद परिवार गहरे दुख में है। परिजनों का कहना है कि कुछ समय पहले ही उसका जन्मदिन मनाया गया था और अब उसकी यादें ही परिवार के पास बची हैं।
बच्ची के पिता ने कहा कि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इलाज से जुड़े दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच अधिकारी के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और संबंधित अस्पतालों से भी आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं।
वहीं, जिन डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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