देश की युवा पीढ़ी जो कि आज भटकती हुई दिख रही है एवं समाज में कुछ और बुराइयां बढ़ती जा रही है, उसे सुधारने और देश की आर्थिक और समाजिक स्थिति को मजबूत करने के लिए जवाबदेही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी को कुछ सुझाव प्रेषित कर रहा हैं।
वर्तमान में पूरे विश्व में युद्ध के कारण जो हालात बने हैं, उससे निपटने के लिए आपने जो संदेश देश की जनता को दिए हैं, उसमें कुछ और सुझाव जोड़े जा सकते है।
1. जैसा कि आपने कहा कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना-चांदी न खरीदे, उसमें एक अपील मंदिर, गुरुद्वारा की प्रबंधन कमेटियों से की जानी चाहिए कि जो सोना उनके खजानों में फालतू पड़ा है, जिसका इस्तेमाल किसी भी कार्य में नहीं किया जा रहा है, उसे बेचकर उस पैसों की बैंकों में एफडी कराई जानी चाहिए और एफडी के ब्याज से गरीब लोगों की जरूरतों को पूरा किया जाना चाहिए। इससे बाजार में सोना-चांदी की उपलब्धता बढ़ जाएगी और बैंकों में पैसा आ जाएगा एवं मूल पैसा मंदिरों, गुरुद्वारों के पास ही रहेगा और ब्याज के पैसों से गरीब और जरूरतमंद लोगों का भला ही होगा।
2. देशभर में न्यायालयों के मालखानों में करोड़ों रुपए का कीमती सामान जब्ती में पड़ा है, जो धीरे-धीरे चोरी करके गायब कर दिया जाता है। ऐसे प्रकरणों का जल्द निराकरण कराकर इस खजाने को काम में लिया जाना चाहिए। पूरे देश के थानों में करोड़ों की संख्या में साइकिल, दो पहिया, चार पहिया वाहन, ट्रक, बस आदि वाहन पड़े-पड़े भंगार हो रहे हैं। इस कबाड़ को रिसाइकिलिंग प्लांट पर भेजकर नया लोहा बन सकता है, जिसका ये प्रभाव पड़ेगा कि आयात में कमी होगी।
3. लाखों पेटी अवैध शराब थानों में जब्त पड़ी है, जो कि धीरे-धीरे चोरी हो जाती है। इस जब्त शराब को सरकारी ड्रिस्ट्रलरियों में भेजकर वापस एथेनॉल बनाया जा सकता है एवं इसमें से निकलने वाला गत्ता, कांच, ढक्कन ये भी रिसाइकल कर दोबारा काम में लिया जा सकता है, लेकिन कार्रवाई के दौरान शराब की बोतलों को बुलडोजर से तुड़वा दिया जाता है और जो गत्ता होता है, उसे जलाकर नष्ट कर दिया जाता है। जो बोतलें फूटती है, उसकी शराब मिट्टी को खराब करती है। कई बार नालों किनारों पर कार्रवाई होती है, जिससे शराब पानी में बहकर नदियों तक पहुंच जाती है, जिससे पानी दूषित होता है।
4. स्वच्छ भारत अभियान के तहत कुछ गिनती के ही शहर स्वच्छ और साफ होने की कोशिश कर रहे हैं, बाकी तो हर प्रदेश में कचरे का अंबार लगा हुआ है। अगर सही दिशा में काम किया जाए तो ये कचरे के अंबार इस समय देश के लिए सोना उगल सकता है।
5. वीबी-जी राम जी योजना (विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के साथ कचरा सफाई योजना को जोड़ा जाना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को कचरा सफाई के काम में लगाना चाहिए। इस कचरे में लोहा, कांच, लकड़ी, सूखा कचरा (जलाऊ), गीला कचरा (जैविक खाद), कपड़ा एवं प्लास्टिक, थर्मोकोल, रबड़ एवं बहुत सा कचरा निकलेगा, जो कि काम में लिया जा सकता है। इससे देश में सफाई भी होगी। कचरे से फैलने वाली बीमारी भी कम होगी। स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे कारखानों को कच्चा माल मिलेगा एवं बारिश में ये सारा कचरा बहकर नदियों में जाता है एवं पीने के पानी को दूषित कर रहा है। वहीं, शहरों की सीवरेज लाइन में यह कचरा फंस जाता है, जिससे पानी का बहाव बाधित हो जाता है, जो बाढ़ का कारण बनता है। कचरे की समस्या को राष्ट्रीय समस्या के रूप में लेते हुए इसे हल करने से आय भी होगी और रोजगार भी मिलेगा, सफाई भी होगी एवं पर्यावरण को भी बहुत अधिक फायदा मिलेगा। बड़े-छोटे डैम एवं तालाबों, कुओं की सफाई सालों से नहीं हुई है, जिसे युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए, नहीं तो पानी के लिए विवाद होना रोज का काम हो जाएगा और अराजकता फैलेगी। शास्त्रों में पवन को गुरु, पानी को पिता, धरती एवं नदियों को मां का दर्जा दिया गया है और हम इन्हें गंदा करके उस ईश्वर को भी नाराज करते हैं, जिसका बदला प्रकृति आपदा के रूप में हमसे लेती है।
5. बढ़ता भ्रष्टाचार एवं नशाखोरी और सोशल मीडिया की लत हमारे देश के लिए बहुत बड़ी समस्याएं बन चुकी हैं, जिसका अंत किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं रह गया। इसके लिए सामूहिक प्रयास करने पड़ेंगे और आपको अपील करनी पड़ेगी। अभी कश्मीर से आई यह खबर कि युवा नशे की गिरफ्त में है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि घरवालों से भी नहीं संभल रहे हैं। घरवाले चाहते हैं कि बच्चों को गिरफ्तार कर सुधारगृह में रखो और ठीक करके लौटा दो। ये कहना है जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का। ऐसी हालात लगभग पूरे देश में हो चुकी हैं। सोशल मीडिया और ओटीटी पर आने वाली वेबसीरीज पर कोई नियत्रंण नहीं है। वह अपनी सीरीज को चलाने के लिए वीभत्स मारधाड़ एवं गाली-गलौज, अश्लील दृश्य, खुलेआम दिखा रहे हैं और यह देखकर युवा इसे अपना रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर वीभत्स तरीके से मारपीट, कत्ल और कानून का मजाक बनाना एवं कानून हाथ में लेना आम बात हो रही है। पुलिस का डर आम जनता के मन से खत्म होता जा रहा है। लोगों ने पुलिसवालों को मारना-पीटना शुरू कर दिया है। देश में मौत की सजा पाए हुए कई र्दुदांत आतंकवादी एवं अपराधी हजारों की संख्या में जेलों में पड़े हुए है, जबकि उनकी सजा पर अमल नहीं किया जा रहा। कानून का डर खत्म होने का एक यह भी कारण है। यही स्थिति रही तो लोग अफसरों और नेताओं को भी निशाना बनाना शुरू कर देंगे, कई घटनाएं हो भी चुकी है। ज्यादातर पुलिसवाले व्यापारी बन चुके हैं।
6. एक और बहुत बड़ा कारण मुफ्त की योजनाएं भी है, जो सभी पार्टियों ने देना शुरू कर दी है। घर बैठे हर माह मिल रहा पैसा, सस्ता अनाज, फ्री इलाज के कारण लोगों में काम करने की इच्छा कम हो रही है। लोग सोशल मीडिया पर ज्यादा समय व्यतीत कर रहे हैं। नशाखोरी बढ़ रही है, जिससे अपराध बढ़ रहे हैं। अच्छी शिक्षा न मिलना और कुशल कारीगरों की कमी के कारण उद्योगों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। अगर यही स्थिति रही तो हम कभी भी चीन का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। अभी भी चीन, वियतनाम, कोरिया जैसे देश हमसे बहुत आगे चल रहे हैं।
महोदय मैं आपका ध्यान भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की स्थानीय समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूं...
बढ़ती गुटबाजी के कारण इंदौर शहर लावारिस जैसा हो गया है। शहर के मंत्री का बयान ‘मेरी हालत शोले के बिना हाथ वाले जैसे ठाकुर जैसी हो गई है।’ बिगड़ती कानून व्यवस्था, यातायात के नियम कोई नहीं मानता, पानी, सड़क, बिजली हर तरह की समस्या इंदौर में बढ़ती जा रही है। अवैध निर्माण ने पूरे शहर का नक्शा बिगाड़ दिया है, जबकि प्रदेश में ट्रिपल इंजन (नगर निगम, प्रदेश एवं देश) की सरकार है। लोगों में नाराजगी बढ़ रही है, जिसका खामियाजा आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है। इंदौर शहर का मास्टर प्लान 2021 में खत्म हो चुका है और नया मास्टर प्लान पिछले 10 सालों से बन ही रहा है, आज तक लागू नहीं हो पाया। विकास कार्य ठप्प जैसी स्थिति में आ चुके हैं। 2028 में उज्जैन में कुंभ के मेले का आयोजन होना है। प्रशासन का ध्यान उज्जैन पर केंद्रित है, लेकिन इंदौर उज्जैन से जुड़ा हुआ है। बाहर से आने वाले यात्री चाहे वह ट्रेन या प्लेन या सड़क मार्ग से आएंगे, तो वह इंदौर होकर ही उज्जैन जाएंगे, लेकिन इंदौर में काेई तैयारी नहीं है। इंदौर बायपास पर दोनों तरफ सड़क चौड़ी होनी है, लेिकन एनएचआई प्रदेश शासन एवं नगर निगम तीनों एक दूसरे पर टाल रहे हैं। आज वाली स्थिति रही तो कुंभ के मेले में इंदौर की स्थिति बहुत दयनीय हो जाएगी और बाहर से आने वाला ट्रैफिक जाम में फंस जाएगा। इंदौर के बायपास पर वैसे ही जाम के हालात बने रहते हैं। जून 2025 में देवास बायपास पर ब्रिज निर्माण के कारण 32 घंटे तक भयंकर जाम लगा रहा, जिसमें 4 हजार वाहन फंसे रहे और तीन लोगों की जान चली गई थी।


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