लखनऊ में हुए कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र शामिल हैं। ये छात्र गेमिंग और एनिमेशन की ट्रेनिंग लेने के लिए संस्थान आते थे। घटना के समय लंच ब्रेक के बाद सभी छात्र अपनी कक्षाओं में मौजूद थे।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इमारत में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता था। मुख्य प्रवेश द्वार बायोमेट्रिक सिस्टम से संचालित होता था, जो थंब इम्प्रेशन के जरिए खुलता और बंद होता था। प्रत्यक्षदर्शी छात्रों के अनुसार आग लगने के दौरान यह सिस्टम काम करना बंद कर गया, जिससे कई छात्र अंदर ही फंस गए। भवन में कोई वैकल्पिक इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं था। कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं से भर गई।
हादसे के समय भवन के अंदर करीब 30 छात्र और कर्मचारी मौजूद थे। इनमें से कुछ छात्र इंटरनेट और डीटीएच के तारों तथा पाइपों के सहारे बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कुछ ने दूसरी मंजिल से कूदकर जान बचाई। कई घायल छात्रों का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
जांच में सामने आया है कि जिस भवन में कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था, वह एक निजी शैक्षणिक संस्थान से जुड़े परिवार की संपत्ति है। यह भवन मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन वर्ष 2014 में इसे व्यावसायिक उपयोग की अनुमति मिल गई थी। गर्मी की छुट्टियों के चलते यहां बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रवेश लिया हुआ था।
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच के आधार पर 16 अधिकारियों और संबंधित लोगों की सूची तैयार की गई है, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
घायल छात्रों के परिजनों और दोस्तों का कहना है कि भवन में ऊपर-नीचे आने-जाने के लिए केवल एक ही सीढ़ी और एक ही प्रवेश-निकास मार्ग था। छत तक पहुंचने वाला दरवाजा भी बंद था। ऐसे में आग और धुएं के बीच फंसे लोगों के पास सुरक्षित बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं बचा।
प्राथमिक जांच के अनुसार, भवन में लगे स्प्लिट एसी के कंप्रेसर में विस्फोट होने से आग भड़कने की आशंका है। विस्फोट के बाद निकली चिंगारियों ने आसपास रखे फर्नीचर और अन्य सामान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आग तेजी से फैल गई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आग के वास्तविक कारणों का पता फोरेंसिक और तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद पहले निचली मंजिलों में धुआं फैला और फिर तेजी से ऊपर पहुंच गया। अचानक बनी स्थिति से घबराकर कई लोग बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे, जबकि कुछ ने खुद को कमरों और बाथरूम में बंद कर लिया। पूरे भवन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
फायर विभाग के अनुसार दोपहर 2:27 बजे कंट्रोल रूम को आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के आठ मिनट के भीतर पहली फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच गई। इसके बाद अतिरिक्त दमकल वाहन, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म तथा राहत एवं बचाव दलों को भी अभियान में लगाया गया।

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