केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि इस पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की जानबूझकर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि सीबीएसई ने करीब 17 लाख छात्रों की परीक्षा के तहत लगभग 58 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया है। इस प्रक्रिया में लगभग 40 करोड़ स्कैन किए गए पन्नों का इस्तेमाल हुआ, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल मूल्यांकन अभियान माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ओएसएम प्रणाली पहली बार लागू की गई है और इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और छात्र-हितैषी बनाना है। इसके जरिए छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखने और अंकों से जुड़े संदेह दूर करने की सुविधा भी मिलती है। उन्होंने माना कि शुरुआती चरण में कुछ तकनीकी और संचालन संबंधी कमियां सामने आई हैं, जिन्हें सरकार गंभीरता से ले रही है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। दोनों संस्थानों के प्रोफेसर इस पूरी प्रणाली की समीक्षा कर रहे हैं ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके।
इसके साथ ही भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सीबीएसई पोर्टल को चार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों—भारतीय स्टेट बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक—के पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया है।
विपक्षी नेता की ओर से उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि कुछ लोग हर सुधार प्रक्रिया का विरोध करते हैं। उन्होंने अपील की कि छात्रों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण न किया जाए, क्योंकि इससे विद्यार्थियों में अनावश्यक तनाव बढ़ता है।
सीबीएसई ने भी पहले ही उन सभी आरोपों को खारिज किया है, जिनमें ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर सवाल उठाए गए थे।

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