वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को लेकर मांग लगातार बढ़ती जा रही है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के बाद अब यूरोपीय देश साइप्रस ने भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल और स्वदेशी कामिकेज (सुसाइड) ड्रोन खरीदने की इच्छा जताई है। इस संभावित समझौते को क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह रणनीतिक पहल साइप्रस के राष्ट्रपति की हालिया भारत यात्रा के दौरान आगे बढ़ी, जहां प्रधानमंत्री के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग रोडमैप पर सहमति बनी। इसके तहत सैन्य प्रशिक्षण, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और रक्षा तकनीक साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई है।
साइप्रस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल के साथ-साथ स्वदेशी ड्रोन प्रणालियों नागास्त्र-1 और स्काईस्ट्राइकर की खरीद में भी रुचि दिखाई है। यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह पहली बार होगा जब भूमध्य सागर क्षेत्र में किसी भारतीय हथियार प्रणाली की तैनाती होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस संभावित डील से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन में बदलाव आ सकता है, जिससे तुर्की की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं। तुर्की लंबे समय से उत्तरी साइप्रस क्षेत्र को लेकर विवाद में शामिल रहा है और इस विकास को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमता और इस नए सहयोग को वैश्विक स्तर पर उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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