मध्य प्रदेश के एक स्कूल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को रद्दी-अखबार पर रखकर मिड-डे मील परोसा जा रहा है। वायरल वीडियो में बच्चे और स्कूल की स्थिति को दिखाते हुए कई लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं।
न थाली न बिछौना, वीडियो वायरल
वायरल हो रहा वीडियो मध्य प्रदेश के श्योपुर का बताया जा रहा है। वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे दोपहर का खाना खाते दिखाई दे रहे हैं। सब अपने सामने अखबार का टुकड़ा रखे हैं, उसके ऊपर रोटी रखी हैं। बच्चों के बैठने के लिए किसी भी तरह का विछावन भी नहीं था। सभी दीवार के किनारे-किनारे सटे बैठे दिखाई देते हैं। अपने अधिकारों से अनभिज्ञ बच्चे बड़े ही उत्साह के साथ खाना खाते दिखाई दे रहे हैं।
अखबार पर इंक क्यों खतरनाक है?
अखबार की प्रिंटिंग में dyes, solvents और ink chemicals इस्तेमाल होते हैं। गरम सब्जी या गरम रोटी की surface heat से यह ink melt हो सकती है और food में transfer होकर शरीर के अंदर चली जाती है। Newspaper का paper भी recycling pulp से बना होता है, जिसमें अलग-अलग धूल, industrial waste का particle, contamination आदि का risk रहता है।
गरम सब्जी से वो ink खाने में लग जाती है
इससे बच्चों को —
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पेट दर्द
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गैस / पेट फूलना
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उल्टी जैसा feel
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loose motion
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infection जैसा पेट खराब हो सकता है।
गरम सब्जी से वो ink खाने में लग जाती है
इससे बच्चों को —
पेट दर्द
गैस / पेट फूलना
उल्टी जैसा feel
loose motion
infection जैसा पेट खराब हो सकता है।
और क्योंकि बच्चे की body छोटी होती है,
जो chemical बड़ों को थोड़ा नुकसान देगा
वही बच्चों को ज्यादा नुकसान कर सकता है।
ये बात समझनी जरूरी है कि जो चीज food-grade नहीं है, वो food के संपर्क में बिल्कुल नहीं आनी चाहिए। Newspaper एक printing medium है, food plate नहीं। FSSAI ने भी साफ नियम दिया है कि—
newspaper food serving / food wrapping के लिए complete ban है।
कभी-कभी मज़बूरी या लापरवाही में अखबार उपयोग हो जाता है, पर इसे आदत बनाना भविष्य में शरीर को नुकसान पहुँचाता है।

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