पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा फिर चर्चा में है। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने, समुद्री सुरक्षा पर चिंता और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र पर टिका दी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात गंभीर हैं, लेकिन इन्हें अभी तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत नहीं माना जा सकता।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है। वहीं चीन पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है और क्षेत्रीय स्थिरता को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन ईरान के साथ आर्थिक और ऊर्जा सहयोग बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका के सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर समेत कई देशों के साथ लंबे समय से सुरक्षा संबंध हैं। इसी वजह से दोनों देशों के हित कई मामलों में अलग दिखाई देते हैं, हालांकि दोनों प्रत्यक्ष सैन्य टकराव से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल अमेरिका और चीन के बीच सीधे युद्ध की संभावना कम है। दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़े हैं, इसलिए कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अधिक संभावित मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्षेत्रीय संघर्ष कई देशों की सीधी सैन्य भागीदारी तक पहुंचता है, तभी व्यापक वैश्विक टकराव का खतरा बढ़ सकता है।

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