श्रावण माह में कावड़ यात्रा, सावन मेला और अन्य धार्मिक आयोजनों को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शासन की ओर से जारी आदेश में कावड़ यात्रियों की सुविधा, स्वच्छता, सुरक्षा और पेयजल व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है।
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से जिलाधिकारियों और नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश भेजे गए हैं। इसके तहत कावड़ मार्गों और प्रमुख शिवालयों के आसपास प्रतिदिन सुबह पांच से आठ बजे तक विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर वहां से पानी निकाला जाएगा तथा मच्छरों की रोकथाम के लिए एंटीलार्वा छिड़काव और फॉगिंग कराई जाएगी।
कावड़ मार्गों पर जनसहयोग से विश्राम स्थलों की व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों के लिए चौबीसों घंटे शुद्ध पेयजल उपलब्ध रहेगा। शिविरों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग जनसुविधाएं बनाई जाएंगी। मोबाइल शौचालय भी लगाए जाएंगे, जिनकी दिन में दो बार सफाई कराई जाएगी।
निर्देशों के अनुसार कावड़ मार्गों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होगी और फुटपाथ, पार्किंग स्थल तथा मार्गों से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। डीजे के संचालन की अनुमति केवल शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही दी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार यात्रियों के रात्रि विश्राम के लिए भी जनसहयोग से व्यवस्था की जाएगी।
कावड़ यात्रा के दौरान मार्गों की निगरानी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल रूम के माध्यम से की जाएगी। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत अभियान चलाकर कराई जाएगी। खुले मेनहोल, चेंबर या अन्य बाधाओं को तत्काल ठीक किया जाएगा। यदि तुरंत मरम्मत संभव नहीं हुई तो वहां बैरिकेडिंग कर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। प्रमुख मंदिरों के आसपास जरूरत के अनुसार अतिरिक्त डस्टबिन भी रखे जाएंगे, ताकि साफ-सफाई बनी रहे।
इधर श्रावण माह की शुरुआत के साथ काशी में भी शिवभक्तों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। विश्वनाथ मंदिर परिसर से लेकर गंगा घाटों तक केसरिया वस्त्रधारी कांवड़ियों की मौजूदगी साफ दिखाई दे रही है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
श्रावण प्रतिपदा के अवसर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में भगवान विश्वनाथ, भगवान दंडपाणि और भगवान बैकुण्ठेश्वर के शिखरों का विधिवत पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई। भगवान बद्रीनारायण मंदिर तक भी श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्पवर्षा से किया गया। माता अन्नपूर्णा को पुष्प अर्पित करने के बाद अक्षत सहित प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। काशी के अन्य प्रमुख शिवालयों में भी श्रावण माह के धार्मिक अनुष्ठान विधिवत शुरू हो गए हैं।

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