पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। बुनियादी अधिकारों, महंगाई और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाओं के बीच कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, जिनमें बल प्रयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय स्रोतों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। रावलाकोट से सामने आए एक वीडियो में सुरक्षा बलों पर एक निहत्थे व्यक्ति पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार के दौरान भी गोलीबारी की घटनाएं हुईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए कई क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। संगठन को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है और उसके प्रमुख नेताओं पर इनाम घोषित किया गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ। पिछले एक वर्ष से स्थानीय लोग गेहूं, आटा और बिजली जैसी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। उनका आरोप है कि सरकार ने उनकी मांगों पर संवाद करने के बजाय सख्ती का रास्ता अपनाया।
विरोध का एक प्रमुख मुद्दा पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें भी हैं। प्रदर्शनकारी इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से प्रभावशाली संस्थाएं विधानसभा की राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। इसी कारण स्थानीय लोगों में राजनीतिक असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
रावलाकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भिंबर और सुधनोती समेत कई इलाकों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने विभिन्न स्थानों पर सड़कों को जाम कर विरोध दर्ज कराया है। कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुई हैं।
मुजफ्फराबाद में नीलम ब्रिज के आसपास पेलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले चार दिनों में 41 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 19 बच्चे और 7 गर्भवती महिलाएं शामिल बताई गई हैं। वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि वास्तविक मृतकों और घायलों की संख्या इससे अधिक हो सकती है।

Post a Comment