मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को इजरायल ने जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान के कई हिस्सों में हवाई हमले किए। इन हमलों में विशेष रूप से देश के मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। घटनाक्रम के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों से अपने सबसे महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, राजधानी तेहरान सहित इश्फाहान और तबरीज जैसे प्रमुख शहरों में कई विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। पश्चिमी तेहरान के करज क्षेत्र से भी जोरदार धमाकों की खबरें सामने आई हैं। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि वायुसेना ने पश्चिम और मध्य ईरान में स्थित चुनिंदा सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई की है।
हमलों के बाद ईरान ने तेहरान स्थित इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इस सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को झटका लगा है।
सूत्रों के मुताबिक, हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति और इजरायल के प्रधानमंत्री के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। बताया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के हालिया मिसाइल हमलों के जवाब में संयम बरतने की अपील की थी। इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर दबाव जारी रहेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया था कि किसी ठोस समझौते तक पहुंचने से पहले ईरान पर लागू प्रतिबंधों और उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों पर लगी रोक में कोई ढील नहीं दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया था कि सकारात्मक प्रगति होने पर भविष्य में कुछ प्रतिबंधों पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
मौजूदा तनाव की शुरुआत रविवार को हुई, जब इजरायल ने आरोप लगाया कि ईरान ने उसकी ओर कई मिसाइलें दागीं। अप्रैल में लागू युद्धविराम के बाद यह पहला प्रत्यक्ष मिसाइल हमला बताया गया। इसके बाद क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिशें और कठिन हो गई हैं।
इसी दौरान इजरायल ने रविवार को दक्षिणी बेरूत के उपनगरों में भी हवाई कार्रवाई की, जिसमें दो लोगों की मौत हुई और 11 अन्य घायल हुए। इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई उत्तरी इजरायल पर हुई बमबारी के जवाब में की गई थी और इसमें हिजबुल्लाह के कथित कमांड सेंटर को निशाना बनाया गया।
क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की आशंकाएं फिर से गहरा गई हैं।

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