इंदौर में 9 से 13 जून तक अंतरराष्ट्रीय स्तर के ब्रिक्स (BRICS) कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों समेत लगभग 20 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।

मंगलवार को सम्मेलन के पहले सत्र के दौरान भारत और रूस के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, कृषि व्यापार का विस्तार करने और सतत कृषि विकास के लिए तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की गई।

बैठक में खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने, बाजारों तक पहुंच बढ़ाने तथा जलवायु अनुकूल खेती से जुड़े अनुसंधान में सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने कृषि क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स समूह वैश्विक कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावशाली मंच बन चुका है। दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के हिस्से में आता है। ऐसे में इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन वैश्विक कृषि नीतियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

9 से 11 जून: कृषि कार्य समूह की बैठकें

सम्मेलन की शुरुआत कृषि कार्य समूह (Agriculture Working Group) की बैठकों से हुई है। तीन दिनों तक विभिन्न देशों के अधिकारी और विशेषज्ञ खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि व्यापार, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि अनुसंधान और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इन बैठकों में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की चुनौतियों, कृषि ऋण, बाजार तक पहुंच और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

12 जून: भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर मंत्री स्तरीय संवाद

12 जून को कृषि मंत्रियों का विशेष संवाद आयोजित होगा, जिसका विषय होगा—‘लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा’।

इस सत्र में कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी, डिजिटल तकनीकों का उपयोग, जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि मॉडल जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

13 जून: कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक

सम्मेलन के अंतिम दिन ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक होगी। इसमें कृषि सहयोग को और मजबूत बनाने, खाद्य हानि कम करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान तलाशने तथा कृषि नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। बैठक के समापन पर साझा सुझावों और सहमति आधारित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किया जाएगा।

चार प्रमुख विषयों पर रहेगा जोर

  • खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका
  • कृषि व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
  • जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि
  • कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार तथा साझेदारी

बनेगी ‘ब्रिक्स वाटिका’

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश देने के लिए सम्मेलन के दौरान ‘ब्रिक्स वाटिका’ विकसित की जाएगी। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सामूहिक रूप से पौधारोपण करेंगे।

विदेशी प्रतिनिधियों को दिखेगी मालवा की झलक

सम्मेलन में शामिल विदेशी मेहमानों को इंदौर और मालवा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया जाएगा। इसके तहत उन्हें शहर के प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण का अवसर मिलेगा।

मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन मध्यप्रदेश को वैश्विक कृषि, निवेश और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करेगा। इससे राज्य की कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सम्मेलन के दौरान कृषि, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती, नवाचार, किसानों की आय वृद्धि और वैश्विक कृषि सहयोग जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। साथ ही प्रतिनिधियों को इंदौर की सांस्कृतिक और पर्यटन विशेषताओं से भी अवगत कराया जाएगा।

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