मध्य प्रदेश सरकार सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026 का नया मसौदा (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है। इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि सरकारी नौकरी के लिए दो से अधिक बच्चों की पाबंदी को बरकरार रखा गया है, जबकि पिछले साल खुद GAD ने ही इस पाबंदी को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी, लेकिन नए नियमों में सरकार इस फैसले से पलट गई है। 24 साल पहले साल 2001 में प्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए यह प्रतिबंध लागू किया था।
क्या कहता है दो बच्चों वाला नियम?
नए ड्राफ्ट के नियम 5 और 6 के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। इसके अनुसार- कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतानें हैं और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ है, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। जुड़वां बच्चों का मामला: यदि किसी का पहले से एक बच्चा है और अगले प्रसव (डिलीवरी) में जुड़वां या उससे ज्यादा बच्चे होते हैं तो वह अपात्र नहीं माना जाएगा।
प्रोबेशन और सीनियरिटी के नए फॉर्मूले
सरकार कर्मचारियों की भर्ती, प्रोबेशन और सीनियरिटी से जुड़े नए नियम भी ला रही है। ये राज्य की अधिकांश सरकारी सेवाओं पर लागू होंगे। नए नियमों के तहत अब अगर कोई कर्मचारी प्रोबेशन पीरियड पर है और अवधि समाप्त होने के 6 महीने के भीतर विभाग उसके स्थायीकरण पर कोई निर्णय नहीं लेता तो उसे ऑटौमेटिकली स्थायी मान लिया जाएगा। यदि एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और प्रमोशन) से लोग आते हैं तो सीनियरिटी सबसे पहले सीधी भर्ती वाले को, फिर अनुकंपा और आखिर में प्रमोशन वाले को मिलेगी, लेकिन यदि तीनों का नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को निकलता है, तो प्रमोटेड व्यक्ति सबसे सीनियर माना जाएगा। इसके बाद सीधी भर्ती और फिर अन्य का नंबर आएगा। हर साल अपडेट होगी ग्रेडेशन लिस्ट: हर साल 1 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक कर्मचारियों की नई ग्रेडेशन लिस्ट अपडेट की जाएगी।
- इन 4 परिस्थितियों में भी नौकरी के लिए होंगे अयोग्य
- एक से अधिक जीवनसाथी: यदि किसी व्यक्ति का एक से अधिक जीवित जीवनसाथी है, तो वह अपात्र होगा (विशेष मामलों में छूट संभव)।
- मेडिकल अनफिट: शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर नियुक्ति नहीं होगी।
- चारित्रिक दाग: नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों से जुड़े अपराध में दोषी पाए जाने पर नौकरी नहीं मिलेगी।
- बर्खास्त कर्मचारी: केंद्र, राज्य या स्थानीय निकाय से नौकरी से हटाए गए लोग अपात्र होंगे।
वित्त विभाग ने पांच विभागों को दिया निर्देश
38 हजार कर्मचारियों के सर्विस रिकार्ड की होगी जांच
प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास और स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों एवं वेतन निर्धारण की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले लगभग 38 हजार कर्मचारियों सहित अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाएगा। वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल के रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति तथा सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े मामलों की जांच की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी को नियमों के विपरीत वित्तीय लाभ दिए गए पाए जाते हैं तो ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
राज्य सरकार के वित्त विभाग ने इन विभागों में लंबित वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के लंबित प्रकरणों का शीघ्र परीक्षण कर उनका निराकरण सुनिश्चित करें।
लंबित मामलों के त्वरित निराकरण पर जोर
वित्त विभाग ने संबंधित विभागों को लंबित वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन संबंधी प्रकरणों के शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए हैं। विभागों को विशेष व्यवस्था बनाकर लंबित मामलों का परीक्षण एवं निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया है। आदेश में कहा गया है कि कई मामलों में वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित विवादों के कारण कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों का समाधान किया जाएगा। विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट भी वित्त विभाग को भेजनी होगी। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
वित्त विभाग को भेजनी होगी रिपोर्ट
आदेश में कहा गया है कि वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और पेंशन संबंधी विवादों के कारण कई कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित प्रकरणों का समाधान किया जाएगा। अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से वित्त विभाग को भेजनी होगी। समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
सेवा पुस्तिकाओं का होगा परीक्षण
वित्त विभाग ने सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं का गहन परीक्षण करें और दर्ज त्रुटियों का समय रहते सुधार करें। आवश्यकता पडऩे पर पूर्व अनुमोदन प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार ने आगामी छह माह के भीतर सेवा अभिलेखों और वेतन निर्धारण से जुड़े लंबित मामलों के निराकरण का लक्ष्य तय किया है। विशेष अभियान के दौरान सेवा में कार्यरत और सेवानिवृत्त दोनों श्रेणी के कर्मचारियों के वित्तीय लाभों से जुड़े मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार निर्णय लिए जाएंगे।
सरदार सरोवर मुआवजा विवाद… मध्यप्रदेश-गुजरात में बनी सहमति
7,388 करोड़ के हिसाब-किताब को लेकर हुई बैठक
मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच पिछले 25 साल से चला आ रहा सरदार सरोवर बांध के मुआवजे का विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों राज्यों के बीच करीब 7,388 करोड़ रुपए के इस सबसे बड़े वित्तीय गतिरोध को सुलझाने के लिए पिछले 6 महीनों से बैक-टू-बैक बैठकों का दौर जारी है। इस सिलसिले में आखिरी हाई-प्रोफाइल बैठक 30 अप्रैल को अहमदाबाद में हो चुकी है। इसमें मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्य सचिव शामिल हुए। गुजरात ने पिछली बैठक में मप्र की देनदारियों को चुकाने को लेकर सैद्धांतिक सहमति (हामी) जताई है। लेकिन राशि का सटीक मिलान करने के लिए दोनों राज्यों की एक संयुक्त फाइनेंशियल टीम (वित्तीय टीम) बनाने के निर्णय लिया है। यह टीम दोनों राज्यों के दावों का अध्ययन कर रही है। दोनों राज्यों के दावों के अध्ययन के बाद अंतिम वित्तीय समायोजन किया जाएगा। इस संबंध में 30 जून से पहले एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जो भोपाल या मुंबई में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मध्यप्रदेश का पक्ष रखने और राज्य के हितों की पैरवी करने की कमान मुख्य सचिव अनुराग जैन और नर्मदा घाटी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा संभालेंगे।
ऊंचाई 58 मीटर बढऩे से बदले हालात
- गांवों का आंकड़ा: 2002 में मप्र के 178 गांव (15,625.6 हेक्टेयर) सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में थे। 2019 में बांध पहली बार पूरी क्षमता से भरने पर वास्तविक स्थिति सामने आई। अब 192 गांवों की 20,822 हेक्टेयर भूमि डूब में है।
- बढ़ गया डूब क्षेत्र: बांध की ऊंचाई बढऩे से मध्यप्रदेश की करीब 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन हमेशा के लिए जलमग्न हो गई।
- क्या है विवाद: सरदार सरोवर विवाद की मुख्य वजह मुआवजे की गणना है। मप्र ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून व 2019-20 के बाजार भाव के आधार पर 7,669 करोड़ रुपए का संशोधित दावा किया है। वहीं गुजरात 2001 की दरों के अनुसार 281 करोड़ रुपए देने पर अड़ा रहा। दूसरी ओर गुजरात ने बांध निर्माण व रखरखाव लागत का हिस्सा बताते हुए मप्र पर 5,516.50 करोड़ रुपए की देनदारी का दावा भी किया, जिसे मप्र ने खारिज कर दिया।



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